केरल : अगर महिला ने पहने है उत्तेजित करने वाले कपड़े तो नहीं बनता यौन उत्पीड़न का मामला

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credit : Pixabay.com)

अदालत की टिप्पणी पर महिला एक्टिविस्ट्स और पूर्व जजों ने आपत्ति जताई

केरल के एक जिला अदालत द्वारा दिया गया फैसला अब विवादों के घेरे में आ गया है. केरल के कोझिकोड जिले की अदालत के यौन उत्पीड़न के केस में आरोपी को अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि यदि महिला उकसाने वाली ड्रेस पहनती है तो फिर प्रथमदृष्टया आरोपी पर आईपीसी के सेक्शन 354 के तहत यौन उत्पीड़न का मामला नहीं बनता।
आपको बता दें कि जज एस कृष्णकुमार ने एक्टिविस्ट और लेखक सिविक चंद्रन को अग्रिम बेल देते हुए यह टिप्पणी की। अदालत के इस फैसले के बाद इस पर विवाद शुरू हो गया है। दो साल पहले चंद्रन पर एक लेखिका से छेड़छाड़ करने का आरोप लगा था। अदालत की टिप्पणी पर महिला एक्टिविस्ट्स और पूर्व जजों ने आपत्ति जताई है। यही नहीं इनकी ओर से मांग की गई है कि इस मामले में अब हाई कोर्ट को दखल देना चाहिए। इसके अलावा पीड़िता ने भी कहा है कि वह जल्दी ही हाई कोर्ट का रुख करेंगी।
वहीं चंद्रन को जमानत देते हुए जज ने टिप्पणी करते हुए कहा, 'आरोपी की ओर से अपने ऐप्लिकेशन के साथ जो तस्वीरें दी गई हैं, उससे पता चलता है कि शिकायतकर्ता ने उकसाने वाली ड्रेस पहनी थी। ऐसे में सेक्शन 354के तहत आरोपी के खिलाफ मामला नहीं बनता।' वहीं इस फैसले पर सवाल उठाते हुए पीड़िता के करीबियों ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि सोशल मीडिया की कुछ तस्वीरों को अदालत में पेश कर दिया गया।
आगे अदालत ने इस मामले में देर से एफआईआर दर्ज किए जाने को मुद्दा बनाते हुए सवाल किया। इस केस में एफआईआर दो साल बाद दर्ज हुई थी, जबकि घटना फरवरी 2020 की बताई जा रही है। शिकायत दर्ज कराने वाली महिला का कहना है कि लेखकों का एक सम्मलेन हुआ था और उसी दौरान यह घटना हुई थी। अपनी शिकायत में महिला ने कहा कि आरोपी लेखक उसे अकसर कॉल करता था और परेशान करता था। लेखक ने जब सारी हदें पार कर दीं तो फिर उसने शिकायत दर्ज कराने का फैसला लिया। इस पर अदालत ने आरोपी की उम्र और उनकी शारीरिक स्थिति का भी हवाला देतेहुए कहा, 'यदि यह मान भी लिया जाए कि शारीरिक संपर्क हुआ था तो इस पर विश्वास करना मुश्किल है कि 74 साल की उम्र और शारीरिक रूप से दिव्यांग शख्स कैसे किसी को जबरन अपनी गोद में बिठा सकता है और उसके प्राइवेट पार्ट को दबा सकता है। ऐसे में इस मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत दी जानी चाहिए।'

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