भारत ने कोरोना मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ा

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ब्राजील का स्थान दुनिया में अव्वल नंबर पर है जहां पिछले 24 घंटे में कोरोना के 91,097 नए मामले सामने आए हैं। भारत में पिछले 24 घंटे में 81,466 नए मामले सामने आए हैं।

नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)| कोरोना के बढ़ते मामलों में भारत की रफ्तार कई गुना तेज हो गई है। इसके साथ ही भारत की गिनती दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उन देशों में हो गई है जहां कोरोना तेजी से फैल रहा है। इस कड़ी में ब्राजील का स्थान दुनिया में अव्वल नंबर पर है जहां पिछले 24 घंटे में कोरोना के 91,097 नए मामले सामने आए हैं। भारत में पिछले 24 घंटे में 81,466 नए मामले सामने आए हैं। अमेरिका में पिछले 24 घंटे में 77,718 नए मामले सामने आए हैं। भारत में पिछले तीन हफ्तों में कोरोना के मामलों में जोरदार उछाल देखी जा रही है।
भारत में सबसे पहला कोरोना केस पिछले साल 30 जनवरी को सामने आया था। उसके बाद से भारत में अबतक 1,23,03,131 संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं। उधर अमेरिका में कोरोना का पहला मामला पिछले साल 22 जनवरी को सामने आया था और अब उनकी संख्या बढ़कर 30,538,427 हो गई है। भारत में महाराष्ट्र कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है। कोरोना से मरने वालों लोगों की संख्या की बात करें तो भारत का स्थान दुनिया भर में चौथा है। इसके पहले अमेरिका, ब्राजील और मैक्सिको का स्थान आता है।
प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo by Wei Xuechao/Xinhua/IANS)
कोरोना के बी117 वैरियेंट ने पिछले साल नबंवर तक 15 देशों में फैलाई अपनी जड़ें
उधर लैबोरेट्री सर्विलांस के बढ़ते महत्व के एक अध्ययन से पता चला है कि खतरनाक सार्स-सीओवी-2 वैरियेंट-बी117 वैरियेंट पिछले साल आधे नबंवर तक दुनिया भर के 15 देशों में अपनी जड़ें फैला चुका था। बी117 वैरियेंट, असली कोरोना वायरस से ज्यादा खतरनाक है। इसका पता पहले यूनाइटेड किंगडम में दिसंबर 2020 में पता चला था। लेकिन एक जर्नल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ये धीरे-धीरे पूरी दुनिया में अपनी जड़ें फैला रहा था। इसका खुलासा संक्रामक रोगों के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाशित एक जर्नल के जरिये हुआ है।
ऑस्टीन में स्थित टेक्सास विश्वविद्यालय के बॉयोलॉजी के प्रोफेसर लॉरेन एन्सल मैयर्स ने बताया , ''हमारे अनुमान के अनुसार बी117 वैरियेंट यूएस में अक्टूबर 2020 में पाया गया था। '' इसकी जांच करने के लिए 15 देशों से आंकड़े जमा किए गए थे। अनुमान के अनुसार यूके से दुनिया भर के 15 देशों में सफर करने वाले लोगों ने पिछठले साल 22 सितंबर से 7 दिसंबर तक तमाम देशों में यह वायरस फैलाया था। लेकिन यूएस में यह वैरियेंट अक्टूबर महीने के बीच में पहुंचा था।
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मैयर्स में कहा ''इस स्टडी से लैबोरेट्री सर्विलांस की महत्व का पता चलता है। '' पहले वायरस सैंपल की स्टडी करके नए वैरियेंट का पता लगाना मुश्किल काम था। रिसर्च टीम ने सीक्येनसिंग के लिए एक ऑनलाइन कैल्कुलेटर बनाया जिससे दोनों को मिलाकर नए वैरियेंटस का पता लगा सके। टैक्सास विश्वविद्यालय के सपैन्सर वूडी ने कहा कि, ''नए केलकयूलेटर से हम सार्स-सीओवी-2 से फैलने वाले वायरस के खतरे को कम कर सकते हैं। इससे हमें लैब में नए वैरियेंट पता करने में आसानी होती है। ''

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