दो सालों में देश भर में की 24 हजार से अधिक बालकों ने आत्महत्या, कारण है चौकाने वाले

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credit : Pixabay.com)

परीक्षा में फ़ेल हो जाने का डर और लव अफेयर बना आत्महत्या करने का सबसे प्रमुख कारण

देश भर में पिछले कई समय से आत्महत्या के केसों में काफी इजाफा देखने मिला है। आर्थिक परेशानी या किसी पारिवारिक कारणों से परेशान व्यक्ति को आत्महत्या करना ही हर समस्या का एक मात्र हल मालूम होता है। हालांकि इसके बाद उसके परिवार और अपनों का क्या हाल होता है वह इसकी कल्पना भी नहीं कर पाता। आत्महत्या से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य आज हम आपको बताने जा रहे है, जिसे देख कर आप भी चौंक जाएँगे। 
कुछ सरकारी आंकड़ो के अनुसार, साल 2017 से 2019 के दो सालों में 14-18 साल के 24000 से अधिक बालकों ने आत्महत्या की थी। इन सभी आंकड़ो में परीक्षा में फ़ेल हो जाने के डर से आत्महत्या करने वाले बालकों की संख्या सबसे अधिक है। फेल हो जाने के डर से तकरीबन 4000 से अधिक बालकों ने आत्महत्या की थी।  नेशनल क्राइम रेकॉर्ड्स ब्यूरो द्वारा संसद में बाल आत्महत्या का डाटा पेश किया गया था। जिसमें यह खुलासा हुआ था। आंकड़ो के अनुसार, साल 2017-19 में 14-18 साल की 13,325 लड़कियों सहित 24,568 बच्चों ने आत्महत्या की थी। जिसमें साल 2017 में 8029, साल 2018 में 8162 और साल 2019 में 8,377 बालकों ने आत्महत्या की थी। 
परीक्षा में फेल हो जाने के डर से सबसे अधिक 4046 बालकों ने आत्महत्या की थी। जबकि 411 लड़कियों सहित 639 नाबालिगों ने शादी से जुड़े कारणों से आत्महत्या की थी। लगभग 3315 ने प्रेमसंबंध के कारण तो 2567 बालकों ने बीमारी के कारण आत्महत्या की थी। इसके अलावा 81 बालकों ने उनके साथ हो रहे शारीरिक शोषण के कारण अपनी जीवन लीला समाप्त की थी। 

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