आप भी चलाते है गाड़ी तो जान लीजिए ये कुछ खास नियम, वरना जेब होगी हलकी

प्रतिकात्मक तस्वीर

ट्राफिक के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए परिवहन मंत्रालय ने किया ट्वीट

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय समय-समय पर गाड़ी चलाने वाले चालकों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न अभियान चलाते हैं। इसका उद्देश्य है कि लोग वाहन चलाते समय अधिक  सावधान और जागृत रहें। इस कार्यक्रम के तहत, मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालकों को नियमों और निर्देशों के प्रति थोड़ा अधिक संवेदनशील और सावधान करने के लिए काम किया जा रहा है।
इस बारे में मंत्रालय ने खुद अपने ट्विटर से ट्वीट करके दिया है। इस ट्विट में लिखा गया है कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के तहत नशे में ड्राइविंग करना अपराध है। अगर पहली बार शराब के नशे में ड्राइविंग करते हुए पकड़े गए तो ड्राइवर को 10,000 रुपये या छह महीने तक की जेल की सजा हो सकती है। यदि चालक द्वारा दूसरी बार ऐसा अपराध करते हुए पकड़ा जाता है या इसके बाद भी ऐसा करते हुए पकड़ा जाता है तो चालक पर 15,000 रुपये का जुर्माना और 2 साल की कैद लगाई जाएगी। देश में ड्रिंक एंड ड्राइव के बढ़ते मामले को रोकने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। एक अन्य ट्वीट में मंत्रालय ने कहा कि बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाना भी अपराध है।
आपको बता दें कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 180 के तहत बिना लाइसेंस के पकड़े जाने पर 5 हजार रुपये का जुर्माना या 3 महीने की कैद हो सकती है। इसका मतलब यह है कि यदि कोई गाड़ी चलाता है तो चालक के पास लाइसेंस होना चाहिए। यही नहीं, समय-समय पर वाहन का रखरखाव भी आवश्यक है। यहां तक कि अगर ऐसा नहीं होता है तो भी वित्तीय जुर्माना लगाने का प्रावधान है। मंत्रालय ने ट्वीट किया कि वाहनों को समय-समय पर साफ और सुरक्षित रखना आवश्यक था।
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190 के तहत बुरी तरह से गाड़ी चलाते पकड़े जाने पर 1500 / - रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि खराब वाहन सड़क सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है। हालांकि, सरकार समय-समय पर पुराने वाहनों को लेकर प्रदूषण को रोकने के प्रयास कर रही है। दूसरी ओर, वास्तविकता यह है कि सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन करने का आदेश दिया है। राजमार्गों जैसे अहम मार्गों पर पुलिस की टीमें समय-समय पर इसकी जांच करती हैं। इस तरह की जांच विशेष रूप से रात में की जाती है।

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