गुजरात : निजी अस्पतालों को कोविड के इलाज की छूट मिली, लेकिन ऑक्सिजन की किल्लत से सब गुड़-गोबर!

छोटे शहरों में नहीं पहुंच रहा ऑक्सीजन, अपूर्ण व्यवस्था के चलते लोगों में फैला रोष

शहर में कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने निजी अस्पतालों को कोरोना वायरस के उपचार के लिए छूट तो दी है, लेकिन ऑक्सीजन नहीं दिए जाने के कारण सैकड़ों मरीजों की हालत खराब हो गई है। सरकार की बात मानने के बाद कुछ ही देर में कोविड केयर सेंटर शुरू करने वाले निजी अस्पताल संचालकों की ऑक्सीज़न की कमी के कारण हालत पतली हो गई है। 
गांधीनगर से सटे साबरकांठा जिला कलेक्टर प्रतिदिन 15 टन की आवश्यकता के सामने मात्र आठ टन ऑक्सीजन ही मिलने की शिकायत कर रहे हैं। जिसके चलते उन्होंने निजी अस्पतालों को ऑक्सीजन देने का इनकार करने से हिम्मतनगर, इडर सहित छोटे-छोटे शहरों में मरीज को बचा पाना मुश्किल साबित हो रहा है। मरीज एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के लिए दौड़ रहे हैं। मात्र साबरकांठा ही नहीं बल्कि अरवल्ली के मोडासा, वालक तथा महेसाणा, पाटण सहित कई स्थानों पर निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण मरीज परेशान हो गए हैं।
प्रतिकात्मक तस्वीर
शुक्रवार को नवसारी में भी यही परिस्थिति थी। वहां नर्स और मेडिकल सुविधाए उपलब्ध थी। फिर भी मरीज दाखिल नहीं किए जा सके। यदि व्यवस्था नहीं थी तो निजी अस्पतालों को छूट क्यों दी गई। ऐसे सवाल खड़े किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 20 अप्रैल को एक निर्देश जारी किया जिस पर की ऑक्सीजन का वहन करने वाले वाहन को एंबुलेंस स्टेटस घोषित किया गया। इतना ही नहीं इन वाहनों को ट्रैफिक में से जल्दी रास्ता क्लियर करके व्यवस्था बनाने के लिए भी निर्देश दिया गया है। अन्य राज्यों में से भी ऑक्सीजन भरे सिलेंडर अहमदाबाद में आ रहे हैं। जोकि कई बार और अवरोधित होते हैं। जिसके चलते छोटे शहरों तक ऑक्सीजन पहुंचने में विलंब हो रहा है।

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