गुजरात : नर्मदा परिक्रमा से प्रेरणा लेकर वलसाड के 5 शिक्षकों की पार नदी की दास्तां जानें

(Photo Credit :etvbharat.com)

अमृत लाल वेगड़ की पुस्तक पढ़कर वलसाड जिले में प्राथमिक शिक्षक के रूप में कार्यरत 5 शिक्षकों ने पार नदी की परिक्रमा करने का निर्णय लिया

आदिवासी संस्कृति का विकास वलसाड जिले से बहने वाली लोकमाता पार नदी के तट पर हुआ है। अमृत लाल वेगड़ की पुस्तक पढ़कर वलसाड जिले में प्राथमिक शिक्षक के रूप में कार्यरत 5 शिक्षकों ने पार नदी की परिक्रमा करने का निर्णय लिया। ये 5 शिक्षक पिछले दो साल से पर नदी के किनारे चक्कर लगा रहे हैं। पार नदी जहां से यह समुद्र से धामनी गांव तक मिलती है वहां तक इन शिक्षकों ने 128 किमी की यात्रा की है। वहीं इस साल धामनी से गाल दहीखेड़ तक का सफर 40 किमी का है।
आपको बता दें कि सौराष्ट्र के मूल निवासी विजय पिठिया कपराडा के वरोली तलत गांव के एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं. अमृत लाल वेगड की पुस्तक नर्मदा परिक्रमा पढ़ने के बाद उनकी प्रकृति को जानने में अधिक रुचि हो गई। उन्होंने वलसाड जिले के मित्र लोकभाषा मोटानी, मौलिक चंद्रवाड़िया, राजा खंभला, हिरेन राजपूत के साथ यात्रा शुरू की। इन 5 शिक्षकों ने 23 दिसंबर 2020 को उमरसादी समुद्र तट से नदी के स्रोत पर जाने का फैसला किया। इन लोगों ने 15 किलो वजनी बैग के साथ सुबह-सुबह यात्रा शुरू की। ईटीवी भारत की माने तो इस यात्रा के दौरान सभी दोस्तों ने भी पेड़ लगाना शुरू कर दिया और लोगों को पेड़ के होने का महत्त्व भी समझाया।
बता दें कि उमरसादी से धरमपुर के धामनी गांव तक 128 किमी के ट्रेक के दौरान, उन्होंने नदी के किनारे कई धाराओं, चट्टानों और उबड़-खाबड़ रास्तों को पार किया। नदी के पथरीले रास्ते पर बूट के गर्म होने और टूटने जैसे कई अनुभव हुए लेकिन कुल मिलाकर उन्हें संस्कृति और प्रकृति दोनों को जानने और समझने में मज़ा आ रहा था। ऐसे क्षण भी थे जब उनके प्राण संकट में दिखाई दिए। नदी के किनारे कई जहरीले सांप भी से गुजरते हुए जहरीले सांपों का भी सामना करना पड़ा। लेकिन जब उन्होंने प्रकृति को खोला, यह महसूस करते हुए कि केवल मनुष्य ही नहीं बल्कि सभी के लिए जगह है, वह उन सभी को भूल गए और आगे बढ़ते रहे।

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