गुजरात हाइकोर्ट ने मांगा जवाब; निजी वाहन से आने वाले मरीजों को क्यों नहीं मिल रहा अस्पताल में प्रवेश?

गुजरात में जरुरी साधनों की कमी की बात को नहीं झुठला सकते, एंबुलेंस के मामले में भी सरकार की स्थिति लाचार - कोर्ट

गुजरात में बढ़ते कोरोना मामलों की संख्या को देखते हुए गुजरात उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई। इस पीआईएल की सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति बलराम करिया की पीठ (बैच) ने कहा कि ये तो सच है कि कोरोना रोगियों के परीक्षण में, उन्हें बिस्तर और ऑक्सीजन मिलने में और रीमेडिविविर इंजेक्शन प्राप्त करने में कठिनाई हो रही थी। हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा था। सरकारी वकील ने बताया कि अभी सबकुछ साफ साफ नहीं बताया जा रहा है। वो लगातार प्रयास कर रहे हैं। सरकारी वकील की दलीलों के बाद अगले मंगलवार को सुनवाई होगी।
आपको बता दें कि कोरोना महामारी के बीच गुजरात सरकार के रवैये से उच्च न्यायालय नाराज है। ऐसे हाईकोर्ट राज्य सरकार को जमकर सुना रही है। सरकार की ओर से महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने हाईकोर्ट में बहस की। इस तर्क में उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य अस्पताल में बेड की कमी है। साथ में उन्होंने बताया कि 15 मार्च, 2020 तक राज्य में ऑक्सीजन का उत्पादन 100 मीट्रिक टन था, जबकि आवश्यकता 55 मीट्रिक टन की थी, लेकिन अचानक ऑक्सीजन की मांग में वृद्धि देखी गई। हमने कभी नहीं कहा, सब कुछ ठीक था और हम लगातार कोशिश कर रहे हैं। वर्तमान में हमारे पास जनशक्ति की कमी है। ऑक्सीजन और इंजेक्शन की कमी है और हम इसे स्वीकार करते हैं। साथ ही 108 का वेटिंग भी धीरे-धीरे अब कम हो जाएगा।
(Photo Credit : vtvgujarati.com)
आपको बता दें कि अधिवक्ता संघ की ओर से पेश वकील अमित पांचाल ने अदालत को बताया कि कोरोना के दिशानिर्देश के अनुसार किसी भी मरीज को भर्ती नहीं किया जा सकता है। ऐसे में 900 बेड का अस्पताल चल रहा है पर मरीज अस्पताल के बाहर ही मर रहे हैं। साथ ही 675 एम्बुलेंस के सामने प्रतिदिन दो हजार से अधिक सकारात्मक मामले आ रहे हैं। एम्बुलेंस की कमी और उचित उपचार के कारण लोग मर रहे हैं। मैं आपसे हाथ जोड़कर कहता हूं कि108 के मुद्दे पर आदेश पारित करें।
इस संबंध में भी, उच्च न्यायालय ने सरकार से कहा कि अगर मरीज निजी वाहन में आते हैं तो उन्हें अस्पताल में प्रवेश क्यों नहीं दिया जाता है? हाईकोर्ट ने इस मामले पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था लेकिन सरकार द्वारा इस मुद्दे पर कोई जवाब नहीं दिया गया है। साथ ही हाईकोर्ट ने एम्बुलेंस की कमी को मानते हुए यह भी कहा कि एंबुलेंस के मामले में भी आपकी स्थिति विरोधाभासी है।

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