गुजरात : कलेक्टर के एक फोन से मानसिक रुप से अस्वस्थ युवती का परिवार के साथ हु्आ मिलन

बगोदरा की संस्था ने युवती का ढाई साल बाद उसके परिवार से मिलन कराया

दाहोद के लढण से बातचीत करती युवती का गृहनगर महाराष्ट्र निकला, बगोदरा की संस्था ने ढाई साल बाद उसे उसके परिवार से मिलन कराया

कुछ दिन पहले दाहोद के कलेक्टर डॉ. हर्षित गोसावी को बगोदरा के एक व्यक्ति का फोन आया और उन्होंने कहा, "सर, हमारी यहां एक मानसिक रूप से परेशान लड़की है, जो हाल में ही बातचीत करने लगी है।  उनकी बातचीत दाहोद के आसपास की लगती है। व्यक्ति ने यदि संभव हो तो जांच करने का अनुरोध किया। एक फोन  और एक हफ्ते की कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार लड़की अपने परिवार से मिल गई।
दाहोद जिला प्रशासन की संवेदनशीलता का परिचय देने वाली यह घटना दिलचस्प है। अंतिम तिथि 31-5-2019 को प्रसिद्ध तीर्थ चोटिला से किसी ने महिला सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन 181 अभयंम पर फोन कर कहा कि यहां एक व्यथित युवती  भटक रही है। बाद में, लड़की को अहमदाबाद जिले के बावला तालुका के बगोदरा में एक स्वयंसेवी संगठन मानव मंदिर सेवा परिवार में स्थानांतरित कर दिया गया।
बच्ची की हालत नाजुक बनी हुई थी,  कुछ बोल नहीं पा रही थी। बस सबके सामने देका करती थी।  बगोदरा में अपने ढाई साल के प्रवास के दौरान, संस्थान के  दिनेशभाई लाठिया द्वारा उनका मानसिक बीमारी के लिए इलाज किया गया था। फिर भी युवती ने कुछ बोलती नहीं थी।
करीब एक पखवाड़े पहले, इस युवती ने थोड़ी बात करना शुरू कर दिया। तो संगठन के सेवकों ने विशेषज्ञों की मदद से उनसे बात करना शुरू कर दिया। जिसमें उसने अपना नाम गीता बताया और बेहद अस्पष्ट भाषा में अपने गांव के तीन नाम बताए। उसकी भाषा से  लठिया को लगा कि गीता का गृहनगर दाहोद के आसपास होना चाहिए। गीता ने जिन गाँवों का नाम ले रही थी उसमें एक गांव कलमाड़ी था। इसलिए उसने दाहोद कलेक्टर को फोन किया। 
कलेक्टर डॉ. ने तुरंत फोन का जवाब दिया। हर्षित गोसावी ने जिला बाल संरक्षण कार्यालय से मामले की जानकारी लेने को कहा है। इसलिए बाल संरक्षण इकाई ने सबसे पहले रतलाम से संपर्क किया। रतलाम के पास के गाँव का नाम करमदी था। साथ ही जानकारी थी कि महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में भी ऐसा ही एक गांव है। अंत में गीता का गांव नंदुरबार की कलमाड़ी ही निकला। 
गांव की जांच में यह भी पता चला कि गीता के पिता सुधामभाई भी उसकी तलाश में गुजरात आए थे। इसके बाद कोरोना काल में उनका निधन हो गया।  एक तरफ बेटी मानसिक रूप से अस्वस्थ हालत में लापता  हो गई तो दूसरी तरफ पिता की मौत हो गई।
उपरोक्त जानकारी श्री लाठिया को दी गई। मानस सेवा मंदिर के कार्यकर्ता एक वाहन से नंदुरबार पहुंचे और अंततः गीता अपने पका अपने परिवार के साथ सुखद मिलन हुआ।  इस कार्यवाही में दाहोद जिला प्रशासन की अहम भूमिका रही। 

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