गरबा पर जीएसटी : डोनेशन पास पर देना होगा 18 % का टैक्स

सीबीआईसी ने माल और सेवा कर के संबंध में 5 जनवरी 2018 को एक परिपत्र जारी कर इसके बारे में स्पष्ट किया था

बीते दो सालों से जहां कोरोना के कारण नवरात्रि और गरबा का रंग फीका फीका रहा वहीं इस साल जीएसटी ने लोगों के  पुराने धूमधाम की उम्मीद पर पानी दिया हैं। इस बार गरबा खेलना महंगा हो गया है। इस बार से गरबा पास पर 18% GST लगाया गया है। सिर्फ सूरत की ही बात करें तो 1 लाख के अलावा खिलाड़ियों को गरबा खेलने के लिए जीएसटी के तौर पर डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान करना होगा। साथ ही राजकोट के 50 हजार के अलावा खिलाड़ियों को 1 करोड़ से ज्यादा का जीएसटी भी देना होगा। गरबा का पास या नाटक सहित मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित करके और उसके  पास की बिक्री से प्राप्त आय को दान आय के रूप में उपयोग करके जीएसटी की चोरी पर एक ब्रेक लगाने के लिए डोनेशन पास पर भी जीएसटी लगाया गया है। अक्सर आयोजक रिश्तेदारों, दोस्तों और अन्य जन-पहचान के लोगों के साथ-साथ कुछ एनजीओ या संस्था के नाम पर पास देकर उस पर लगने वाले जीएसटी से बचने की कोशिश करते है। उन्हें कार्यक्रम के प्रायोजक के रूप में दिखाकर और उनके विज्ञापन के साथ पास देकर माल और सेवा कर से बचते थे। ऐसे में डोनेशन इनकम दिखाकर जीएसटी की चोरी पर ब्रेक लगा दिया गया है। पास की कीमत दिखाए बिना केवल दान में दिए जाने वाले पास पर 18% जीएसटी लगेगा।
आपको बता दें कि सीबीआईसी ने माल और सेवा कर के संबंध में 5 जनवरी 2018 को एक परिपत्र जारी किया। मनोरंजन कार्यक्रमों या गरबा कार्यक्रमों के लिए पास से होने वाले राजस्व पर 500 रुपये से अधिक के राजस्व पर 18 जीएसटी लगाने का आदेश दिया गया। लेकिन जीएसटी-गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स के बोझ से बचने के लिए उसने यह दिखाकर जीएसटी के भुगतान से परहेज किया कि उसने उन लोगों को पास दिए हैं जिन्होंने बिना पास की लागत रखे कार्यक्रम में दान दिया था। फिर कुछ लोगों ने इस पास की कीमत 500 से कम करके टैक्स चोरी करना शुरू कर दिया। वर्ष के दौरान एक सप्ताहांत के लिए सर्कस, नृत्य कार्यक्रम, थिएटर प्रदर्शन कार्यक्रम या विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन जैसे आयोजन आयोजकों से जीएसटी एकत्र करने का निर्णय लिया गया है। सौंदर्य प्रतियोगिता, संगीतमय रात्रि प्रदर्शन कार्यक्रमों आदि के टिकटों पर भी जीएसटी लागू करने का निर्णय लिया गया।

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