गंगा दशहरा पर गंगा मैया का स्मरण करता है दस तरह के पापों का नाश

प्रतिकात्मक तस्वीर

आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए गंगा दशहरा के दिन लगाना चाहिए अनार का पेड़

जिस दिन माँ गंगा समस्त प्राणियों के कल्याणार्थ धरती पर अवतरित हुईं, आज उसी दिन को गंगा दशहरा के रुप मे मनाया जाता है। प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है और यह इस वर्ष यह तिथि 20 जून को पड़ रही है। श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय निम्बाहेड़ा के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय तिवारी ने बताया कि इस दिन पवित्र गंगा नदी में स्नान करने और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन मोक्षदायिनी, पतित पावनी माता गंगा में आस्था की डुबकी लगाने मात्र से प्राणियों के समस्त पापों का नाश हो जाता है। डॉ. तिवारी ने बताया कि चूँकि इस बार गंगा दशहरा पर्व पर ज्योतिष की दृष्टि से कई शुभ योगों का निर्माण भी हो रहा है। अतः ये इस बार ये विशेष शुभ फलदायी साबित होगी। इधर, इसी दिन गुरु ग्रह भी शनि की राशि कुंभ में वक्री होने जा रहे है जो आगामी लगभग 4 महीने तक ऐसे ही रहेंगे। आर्थिक तंगी से छुटकारा पाने और धन प्राप्ति के लिए इस दिन विशेष उपाय कारगर साबित होंगे। धन, सुख व शान्ति की इच्छा रखने वाले लोगो को  खासकर यदि वर्तमान कोरोना महामारी में गंगा नदी में यदि स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो अपने घर पर भी नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर पुण्य अर्जित कर इस दिन को खास यादगार बनाया जा सकता है। इस दिन स्नान के बाद पूरे घर में गंगाजल जरूर छिड़कना चाहिए और भगवान शंकर का गंगाजल से अभिषेक अवश्य करना चाहिए। नौकरी या व्यवसाय में सफलता प्राप्ति हेतु गंगा दशहरा के दिन मिट्टी के घड़े में जल भरकर कुछ बूंदे गंगाजल का डालकर दान करना चाहिए।
कर्ज मुक्ति हेतु गंगा दशहरा के दिन अपनी लंबाई के अनुसार काला धागा लें और उसे एक नारियल पर लपेटकर इस नारियल को पूजा में रख देवें व शाम के समय बहते हुए पानी में विसर्जित कर इसके बाद बिना पीछे मुड़े सीधे अपने घर वापस लौट आएं। आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगो को गंगा दशहरा के दिन अनार का पेड़ लगाना चाहिए इससे आर्थिक तंगी दूर होती है, और धन के आगमन की प्रबल संभावनाएं बनती है। इस दिन गंगा में स्नान करने से दस तरह के पापों से मुक्ति मिलती है। दस पापों में परस्त्री के साथ समागम, जबरदस्ती किसी की वस्तु लेना, कटुवचन का प्रयोग करना, किसी के साथ हिंसा, किसी की निंदा करना, असत्य वचन या झूठ बोलना, असंबद्ध प्रलाप, दूसरे की संपत्ति हड़पना या ऐसी इच्छा रखना, अनावश्यक किसी की बातों पर परिचर्चा करना इत्यादि शामिल है। कहा जाता है कि अगर किसी को अपनी गलती का एहसास है और वो पश्चाताप करना चाहता है तो गंगा दशहरा के दिन उसे गंगा स्नान करके माता गंगा से पाप मुक्ति की प्रार्थना करनी चाहिए।
- डॉ.मृत्युंजय तिवारी

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