आने वाले शादी के मौसम में संगीत संध्या में पारंपरिक लग्न गीत गाने वालों को बुलाइए, आर्केस्ट्रा-डीजे को छोड़िए!

प्रतिकारात्मक तस्वीर

आज के समय जहां नई पीढ़ी में डीजे कोलेकर एक उत्साह है वहीं पारंपरिक संगीत को भी मिल रहा है सम्मान

आज के दौर में शादी के स्वरुप में बहुत बदलाव आ गया हैं. जहाँ पहले लोग शहनाई और तबले के साथ होती थी वहीं अब बिना डीजे के कोई शादी ही नहीं होती। शादियों में तो डीजे-संगीत की शामें होती हैं और उसमें भी हमेशा ही डीजे ऑर्केस्ट्रा देखने को मिलता है. लेकिन ऐसा नहीं है कि इन सबके बीच में पुरानी परंपरा लुप्त हो गई है। इन सबके बीच पारंपरिक शादी के गानों की जगह आज भी जिंदा है। डीजे के सुरों और थाप के बीच लोग आज भी पारंपरिक गीत सुनना पसंद कर रहे है।
गौरतलब है कि पिछले दो सालों में कोरोना के कारण जैसे सब कुछ प्रभावित हुआ है वैसे ही शादी में भी बहुत बदलाव आया है। दो सालों तक शादी-विवाह की संख्या में भी कमी होने से इस साल काफी शादियां हो रही हैं। परंपरागत विवाह काल के दौरान शीतकालीन शादियां न हो पाने के कारण प्रति वर्ष शादियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। इस समय शादियों में संगीत समारोह रखा जाता हैं और डीजे और हाई-प्रोफाइल ऑर्केस्ट्रा गानोंके साथ घर के बड़े बुजुर्ग अपने समय के पारंपरिक गीत सुन रहे है और आज के युवा पीढ़ी को भी ये सब बहुत पसंद आ रहा है। इतना ही नहीं शादी के मौके पर पारंपरिक विवाह गीतों का अलग कार्यक्रम आयोजित किया जाता है जिसमें बड़े-बुजुर्ग भी मस्ती करते नजर आते हैं।  साथ ही समाज में इस प्रथा को सबका साथ भी मिल रहा है।
शादी के गीतों की प्रथा को बनाए रखने वाले अदजन अनाविल सहियार मंडल 2 के विभूतिबेन देसाई ने कहा कि घर के बुजुर्गों को संगीत संध्याओं में पारंपरिक शादी के गीतों का नामोनिशान नहीं दिखता है।  डीजे और ऑर्केस्ट्रा जहां चाहें वहां एक का एक ही तरह का गाना बजता हैं। जबकि पारंपरिक संगीत समारोह और विवाह में शादी के हर तरह से गाने गाए जाते हैं। जब शादी के गीत बच्चों और बड़ों के नाम से गाए जाते हैं तो माहौल कुछ अलग हो जाता है।  हमारे प्रयासों को व्यापक प्रतिक्रिया मिली है।

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