डॉक्टर की लापरवाही से मरीज को निकलवाना पड़ा था अपना फेफड़ा, कोर्ट ने किया 5 लाख का दंड

प्रतिकात्मक तस्वीर

केस दर्ज होने की तारीख से 30 दिनों के अंदर 8 प्रतिशत व्याज के साथ रकम देने का दिया आदेश

आम तौर पर हर कोई अपनी बीमारी के खर्चो से बचने के लिए और अपनी अनुपस्थिति में अपने परिवार की सुरक्षा के लिए बीमा करवाता है। हालांकि दिक्कत तब हो जाती है, जब व्यक्ति के ना रहने के बाद उसके बीमा का निकाल ना हो पाए। कुछ ऐसा ही हुआ अहमदाबाद के इस मामले में, जिसमें कोर्ट की सुनवाई के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। विस्तृत जानकारी के अनुसार, शहर में एक मरीज की मई 2013 में फेफड़ों में पानी भर जाने और थक्का जमने के कारण सर्जरी की गई थी। हालांकि ऑपरेशन के बाद भी बुखार और खांसी दूर नहीं हुई, इतना ही नहीं, मवाद के कारण फेफड़े और भी कमजोर हो गए। नतीजतन मरीज को अन्य हॉस्पिटल में जाकर बायाँ फेफड़ा निकलवाना पड़ा था। 
इस मामले में सात साल बाद अहमदाबाद की कंज्यूमर कोर्ट ने डॉ. के.एस. राजेश हैदराबादी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को मुआवजे के रूप में 5 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने केस दर्ज होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर 8 फीसदी ब्याज के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना और आवेदन खर्च के लिए 8,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। उपभोक्ता आयोग ने कहा कि इस मामले में डॉ. हैदराबादी की लापरवाही साफ़ी दिखाई दे रही है। 
चांदखेड़ा के मौलिक शाह ने कोर्ट में केस किया था। जिसमें वकील ने दलील करते हुये कहा कि मरीज की बीमारी के कारण उनकी डॉ. हैदराबादी के यहाँ सर्जरी हुई। लेकिन ऑपरेशन के बाद समस्या और बढ़ गई, उस समय इलाज का खर्च 65,000 रुपये था और रिपोर्ट का खर्च 25,000 रुपए जितना आया था। हालांकि अभी भी स्थिति सही नहीं हुई थी, इसके चलते उन्हें दूसरा ऑपरेशन करवाना पड़ा। दूसरे ऑपरेशन में मरीज के 1.05 लाख रुपये खर्च हुए और 50,000 दवा तथा रिपोर्ट आई। डॉ. हैदराबादी ने केवल मरीज को अंधेरे में रखकर ऑपरेशन सफल होने का नाटक किया। इसके चलते याचिकाकर्ता ने 15 लाख रुपये मुआवजे की मांग की। दूसरी ओर डॉ. हैदराबाद से बचाव पक्ष ने कहा कि मानक चिकित्सा देखभाल की मदद से ऑपरेशन सावधानी से किया गया और कोई लापरवाही नहीं दिखाई गई। पूरे मामले में बीमा कंपनी द्वारा कहा गया की मरीज ने दूसरी जगह भी इलाज करवाया है, उनके बीच ऐसा कोई करार नहीं हुआ था। जिस पर कोर्ट ने कहा कि मरीज ने बीमा लिया हुआ है, ऐसे में उसे उसका मुआवजा मिलना चाहिए।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:


ये भी पढ़ें