मधुमेह : सरकार ने उठाया बड़ा कदम, इस गंभीर बीमारी के मरीजों को मिलेगी बहुत राहत

सरकार ने शुक्रवार को मधुमेह की सस्ती दवा सीटाग्लिप्टीन और इसके अन्य मिश्रणों को बाजार में उतारा जो दवा जेनरिक दवाओं की दुकान जनऔषधि केंद्रों पर मिलेगी

देश में फैली प्रमुख बीमारियों में डायबिटीज भी एक हैं। देश में लगभग 10 करोड़ मरीज इसके शिकार है और महंगी-मंहगी दवाओं और चिकित्सा प्रक्रिया को लेने को मजबूर है। अब इन मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। सरकार ने शुक्रवार को मधुमेह की सस्ती दवा सीटाग्लिप्टीन और इसके अन्य मिश्रणों को बाजार में उतारा है। इसके 10 टैबलेट की कीमत 60 रुपये तक होगी और यह दवा जेनरिक दवाओं की दुकान जनऔषधि केंद्रों पर मिलेगी। साथ ही डायबिटीज की सबसे पॉपुलर दवा मेटफॉर्मिन पहले से जेनेरिक दवाओं की लिस्ट में शामिल है लेकिन सीटाग्लिप्टिन को उससे भी ज्यादा असरकारी दवा माना जाता है। इस दवा की खासियत ये है कि यह टाइप टू डायबिटीज के मरीजों को काफी फायदा देती है। यह दवा ब्लड शुगर को बहुत ज्यादा लो नहीं करती। इसके अलावा इस दवा से दिल को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचता जबकि डायबिटीज की कई दूसरी दवाओं में इस तरह के खतरे बने रहते हैं। 

बाजार से बेहद कम कीमत पर उपलब्ध 


आपको बता दें कि इस बारे में रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि फार्मास्यूटिकल एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) ने सीटाग्लिप्टीन और इसके मिश्रणों के नए संस्करण जनऔषधि केंद्रों में उतारे हैं। ऐसे में अब बाजार में ढाई सौ रूपए या इससे ज्यादा की कीमत पर मिलने वाली यह दवा बेहद सस्ती हो गई है। भारतीय जन औषधि परियोजना के सीईओ रवि दधीच ने बताया कि इस दवा के सभी प्रकार के दाम ब्रांडेड दवाओं से 60 से 70 प्रतिशत कम हैं। इसी दवा की ब्रांडेड दवाओं की कीमत 160 रुपये से लेकर 258 रुपये तक है। सीटाग्लिप्टीन फॉस्फेट के 50 मिलीग्राम(एमजी) वाले दस टैबलेट 60 रुपये में जबकि 100एमजी वाले 100 रुपये उपलब्ध हैं। वहीं सीटाग्लिप्टीन और मेटफॉर्मिन हाइड्रोक्लोराइड का 50एमजी/500एमजी अनुपात वाला मिश्रण 65 रुपये प्रति 10 टेबलेट जबकि 50एमजी/1000एमजी का मिश्रण 70 रुपये में उपलब्ध होगा। जेनेरिक दवा के तहत सीटाग्लिप्टिन और मेटफॉर्मिन का कॉन्बिनेशन भी जल्द ही जन औषधि स्टोर पर मिलने लगेगा।

देश में 8700 जितने जन औषधि स्टोर


भारत में फिलहाल 8700 जन औषधि स्टोर हैं, जहां 1600 दवाएं बिकती हैं। जल्द ही 138  और दवाओं को इसी श्रेणी में शामिल कर जेनेरिक दवा के तौर पर सस्ते दामों में बेचा जा सकेगा। 138 नई दवाओं की पहचान भी कर ली गई है। इस साल के अंत तक उनके जेनेरिक स्टोर पर पहुंच जाने की उम्मीद जताई जा रही है। 

प्राइवेट अस्पताल की लूट


एक तरफ मोदी सरकार देश के लोगों को सस्ती-सुलभ दवाएं पहुंचाने में लगी है वहीं दूसरी ओर प्राइवेट अस्पताल मालिक अपने मुनाफे के लिए अपने कैंपस या अस्पताल के साथ खोले स्टोर पर केवल महंगी और ब्रांडेड दवाएं ही बेच रहे हैं। साथ ही डॉक्टर इन्हीं महंगी दवाओं को लिख रहे हैं। एकाध प्राइवेट अस्पताल को छोड़कर किसी में भी जनऔषधि केंद्र नहीं खोले गए हैं।

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