जानें किस तरह सरकार की विभिन्न योजनाओं की वजह से इस विधवा महिला के जीवन में आया बदलाव

(Photo Credit : divyabhaskar.co.in)

आठ साल पहले पति की हो गई थी आकस्मिक मृत्यु, पुत्र के साथ परिवार की सारी ज़िम्मेदारी आ गई थी माता के सर

देश भर में चलने वाली केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न नीतियाँ गरीब प्रजा के लिए काफी लाभदायक और हितकारी होती है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण अहमदाबाद की भावना बेन के मामले में देखने मिला है। अहमदाबाद के गिरधरनगर में रहने वाली भावना बेन के पति की आठ साल पहले अचानक ही मृत्यु हो गई। पति की मृत्यु के बाद एक साल के बेटे की और अन्य सभी जिम्मेदारियाँ मजदूरी कर के अपना पेट पालने वाली भावनाबेन पर आ गई। अपने बेटे रोहित के भविष्य की चिंता भावना बेन को सताने लगी। 
सभी परेशानियों के बीच भावनाबेन को सरकार की कई नीतियों का सहारा मिला। बेटे को पढ़ाने के लिए भावना बेन को राइट टू एज्यूकेशन (RTE) एक्ट का फायदा मिला। इसके चलते रोहित की पढ़ाई की चिंता भावना बेन के सर पर से कम हुई। इसके बाद कोरोना काल में गंगास्वरूप पेंशन सहाय योजना की जानकारी मिली। भावना बेन ने इसका फॉर्म भरा और आज पेंशन की रकम सीधा उनके अकाउंट में ट्रांसफर होती है। पेंशन की इस रकम के कारण उनका आर्थिक संकट भी कुछ हद तक कम हुआ। 
अब तक तो भावना बेन मजदूरी कर अपना जीवन गुजार रही थी। पर कोरोना काल में सभी के साथ भावनाबेन की नौकरी भी चली गई। नौकरी ना होने पर दो समय  का खाना भी नसीब होना मुश्किल हो गया। ऐसे में NFSA द्वारा कम कीमतों पर मिलने वाले अनाज की सुविधा के बारे में भावनाबेन को जानकारी हुई। जिसके लिए भी उन्होंने उचित फॉर्म भरा और आज वह कम कीमतों पर सरकार की और से मिलने वाले अनाज की सुविधा का फायदा उठा रहे है। 
इस बारे में बात करते हुए भावना बेन कहती है कि कोरोना काल में जीवन चलना काफी मुश्किल हो गया था। ऐसे में सरकार द्वारा मिलने वाली पेंशन ही एक मात्र सहारा रह गई थी। इसके अलावा सरकार द्वारा कम कीमतों पर अनाज भी उपलब्ध कराये जाने से उनके जैसे गरीबों के जीवन में काफी फायदा हुआ है। 

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