अहमदाबादः सिविल अस्पताल में कोविड-19 एवं आंत की जटिल सर्जरी की सफलता के बाद सात महीने की बच्ची हुई स्वस्थ

कोविड-19 के बीच आंत की आपरेशन के बाद स्वस्थ हुई सात माह की अनन्या

बच्ची की छोटी आंत और बड़ी आंत के बीच लगभग 12 सेमी. का हिस्सा काला हो गया था, जिसे सर्जरी से हटा दिया गया

भावुक हिंदी कवि और संत कबीर दास ने अमर दोहा की रचना की है कि "जाको राखे साइयां, मार सकै न कोई, बाल न बाका करि सकै जो जग बैरी होय। इसका भावार्थ यह है कि यदि ईश्वरीय शक्ति आपके पक्ष में है तो कोई भी विपदा आपका कुछ भी नुकसान नहीं कर सकती है।  कोविड-19 की दूसरी लहर के इस विकट समय में भी भावनगर की सात माह की बेटी अनन्या ने अहमदाबाद सिविल में कोरोना संक्रमण और गंभीर सर्जरी का सामना कर  हंसते हुए मौत से जंग जीत ली है। बच्ची अब सामान्य बच्चों की तरह बंसने खेलने लगी है। 
भावनगर निवासी दिनेशभाई एवं पिंकीबेन राजपूत की सात माह की बेटी अनन्या को शौचालय जाने में दिक्कत हो रही थी। आंतरिक दबाव के कारण पेट फूलना और तेज बुखार भी एक समस्या थी। साथ ही 4-5 दिन से उल्टी भी होती रही। अनन्या की समस्याओं की गंभीरता को देखते हुए भावनगर के डॉक्टरों ने उन्हें आगे के इलाज के लिए अहमदाबाद जाने को कहा।
बच्ची को अहमदाबाद सिविल में बाल शल्य चिकित्सा विभाग में भर्ती कराया गया था। यहां इसे पहले स्थिर किया गया और एक साथ विभिन्न परीक्षण किए गए। अनन्या का हीमोग्लोबिन कम था। रिपोर्ट में ileoileocolic intussusception ( जिसमें छोटी आंत का भाग बड़ी आंत में घुस जाने की स्थिति) पाई गई, जिससे पेट सूजन और उल्टी होती है। अधूरा में पूरा यानी बच्ची का कोविड-19 का आरटीपीसीआर टेस्ट भी पॉजिटिव आया। इस बार यह डॉक्टरों की विशेषज्ञता की परीक्षा थी। डॉक्टरों ने भी इस चुनौती पर काबू पा लिया और 28 अप्रैल को लड़की की इमरजेंसी सर्जरी करवाई गई। ऑपरेशन के दौरान पता चला कि बच्ची की छोटी आंत और बड़ी आंत के बीच करीब 15 सेमी. जावडो का हिस्सा में सडन हो गया। शरीर से बेकार खुराक को बाहर निकालने वाली एक ट्युब यानी बावेल पर भी सूजन था।  आंत का सड़ा हुआ हिस्सा निकाल दिया गया।
यह जटिल सर्जरी सिविल अस्पताल के बाल चिकित्सा शल्य विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जय श्रीरमजी द्वारा अंजाम दिया।  एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. भावना रावल ने संभाली थी। ऑपरेशन के बाद  अनन्या को कोविड-19 के विशेषज्ञ देखभाल के लिए बाल रोग विभाग डॉ. जॉली वैष्णव, डॉ. अनुया चौहान और डॉ. हैप्पी पटेल की देखरेख में रखा गया। यहां उन्हें सांस लेने में तकलीफ के कारण एरवो सपोर्ट पर रखा गया था। धीरे-धीरे अनन्या की हालत में सुधार होने लगा और ऑक्सीजन सपोर्ट हटा दिया गया। ऑपरेशन के चौथे दिन से उसने खाना शुरू कर दिया। अब यह भोजन को अच्छी तरह से पचाता है और बेकार भोजन को रंध्र  (स्ट्रोमी) द्वारा बाहर निकालता है।
सिविल अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रमुख एवं अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी के अनुसार, 3  से 8 महीने की उम्र के बच्चों में आंतों में रुकावट का सबसे आम कारण इंट्यूसेप्शन है। शुरुआत में बिना सर्जरी के इसका इलाज किया जा सकता है, लेकिन जब बच्चे में ये लक्षण 2-3 दिनों से रहें तो सर्जरी जरूरी हो जाती है।
डॉ जोशी ने बताया कि कोविड-19 के चलते बच्ची की हालत गंभीर थी।  ऐसे मामलों में, सर्जरी और रिकवरी अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है क्योंकि कोविड -19 संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकता था। इस मामले में, सर्जरी के दौरान विशेषज्ञ एनेस्थेटिक प्रबंधन, ऑपरेशन के बाद विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा प्रदान की जाने वाली मैटीकुलस देखभाल और महत्वपूर्ण बाल चिकित्सा गहन देखभाल सहित  बहुआयामी दृष्टिकोण  महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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