अहमदाबाद : भारतीय तिरंगा बना 'युद्धरोधी' ढाल, बचाई युवाओं की जान, जानें

प्रतिकारात्मक तस्वीर

दुनिया की महाशक्तियों समेत अन्य देशों ने भी भारतीय तिरंगे की ताकत देखी

 किसी देश के राष्ट्रीय ध्वज ने विश्व युद्ध जैसे हालात में देश के नागरिकों-युवाओं की जान विदेश की जमीन पर बचाई है। इतना ही नहीं, झंडे ने सम्मान के साथ दुनिया में अपना प्रभाव बढ़ाया है, आस-पास देखी जाने वाली घटनाएं भी भारतीय तिरंगे की शान का प्रमाण हैं। यूक्रेन में युद्ध में फंसे और तिरंगे से बचाए गए भारतीय युवाओं की घटनाएं आज भी ताजा हैं। रूस यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीय छात्रों ने अनुभव किया है कि भारतीय तिरंगा कितना शक्तिशाली है। भारतीय तिरंगा ऐसे समय में भारतीय युवाओं के लिए 'युद्धरोधी' ढाल बन गया जब विदेशी धरती पर भीषण युद्ध के बीच जीवन और मृत्यु बहुत दूर नहीं थी और युवाओं की जान बचाई।
इसके साथ ही दुनिया की महाशक्तियों समेत अन्य देशों ने भी भारतीय तिरंगे की ताकत देखी। भारत हो या विदेश में रहने वाले एनआरआई... सभी गर्व से कहते हैं, ये आन तिरंगा है, ये शान तिरंगा है, मेरी जान तिरंगा है, अरमान तिरंगा है, अभिमान तिरंगा है, मेरी जान तिरंगा है... देशवासियों के बीच जबकि तैयारियां हो रही हैं हर घर तिरंगा अभियान के लिए, जो स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना का अवसर है, विदेशी धरती पर भी भारतीय तिरंगे के प्रभाव की ताजा घटनाएं हुई हैं, और लोग इसे सोशल मीडिया के माध्यम से साझा कर रहे हैं, तिरंगा पर अपना गौरव व्यक्त कर रहे हैं। 
एमबीबीएस के छठे वर्ष में पढ़ने वाले एक भारतीय छात्र उदय खुंट कहते हैं, हमारी जान तिरंगा है - ये भावनाएँ तब पैदा हुईं जब मैं और मेरे दोस्त रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान 9 दिनों तक रोमानियाई सीमा पर फंसे रहे। भारत सरकार ने निर्देश दिया था कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के सहारे रोमानिया, पोलैंड या हंगरी की सीमा पर पहुंचें। छात्रों के रूप में हमारे पास कागज और रंग थे, जिनसे हमने राष्ट्रीय ध्वज बनाया और उसे सम्मानपूर्वक बस के सामने रखा। 
राष्ट्रीय ध्वज बनाते समय जीवन का यह एक अद्भुत अनुभव था कि ये केवल रंग नहीं हैं बल्कि अनादि काल से आज तक बने एक महान देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। उदय का कहना है कि, इस झंडे को देखकर, चाहे वह यूक्रेनियन हो या रूसी, उनमें भारत, हमारी भारतीय संस्कृति, हमारे व्यवहार के प्रति अच्छी भावना होगी और हमारे राष्ट्रीय ध्वज को पहचानकर सभी भारतीयों के साथ अच्छा व्यवहार करेंगे। ऐसे समय में तिरंगा ही हमारी एकमात्र आशा था और तिरंगा हमारे लिए वरदान साबित हुआ। उदय ने आगे कहा कि रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचने के लिए हमारी बसों को दो जगहों पर रोका गया। बस को एक बार यूक्रेन के सैनिकों ने और एक बार रूसी सैनिकों ने रोका। राष्ट्रीय ध्वज देखकर पूछा, भारतीयों? हमारे हां कहने के बाद, हमें तुरंत आगे बढ़ने की अनुमति दी गई।
यह देखकर दिल ने गर्व से कहा, सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा। हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि तिरंगे की मदद से हम रोमानियाई सीमा तक पहुंच पाएंगे। वहां से हमें प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन गंगा के जरिए भारत लाया गया। इस प्रकार, तिरंगा वास्तव में विदेशों में रहने वाले उदय खुंट जैसे कई भारतीय नागरिकों के लिए एक जीवनरक्षक साबित हुआ है। जिससे अन्य देशों के नागरिकों में त्रिरंगा के प्रति सम्मान की भावना बढ़ी है।

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