अहमदाबाद : सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने किया कमाल, तीन घंटे के जटिल ऑपरेशन से 15 साल पुरानी समस्या को किया दूर

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डॉक्टरों की एक टीम ने 32 वर्षीय तन्वीबेन का एक दुर्लभ बीमारी का सफलतापूर्वक इलाज किया

अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की एक टीम ने 32 वर्षीय तन्वीबेन का एक दुर्लभ बीमारी का सफलतापूर्वक इलाज कर एक बार फिर इतिहास रच दिया है। युवती पिछले 15 साल से असहनीय दर्द से गुजर रही थी। जटिल इलाज के बाद सिविल अस्पताल के स्पाइन सर्जनों ने दर्द से निजात दिला दी है।
जानकारी के अनुसार अहमदाबाद के हाथीजान इलाके की रहने वाली तन्वीबेन को  रीढ़ की हड्डी की समस्या के कारण काफी समय से चलने-फिरने और सोने में दिक्कत हो रही थी। धीरे-धीरे समस्या विकराल होने लगी। उनके पति ने इस समस्या के इलाज के लिए कई निजी अस्पतालों से संपर्क किया लेकिन कहीं भी कोई संतोषजनक परिणाम नहीं मिला। कुछ जगहों पर सर्जरी की गारंटी होने पर पैसे बहुत बड़ा सवाल बन गया।
इस प्रकार की सर्जरी बेहद जटिल थी और इसमें 3 लाख रुपये खर्च होने थे, जिससे तन्वीबेन के परिवार के लिए यह असंभव हो गया। इन सभी स्थितियों से बाहर निकलने का एक ही रास्ता था और वह था सिविल अस्पताल। तन्वीबेन को इलाज के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक्स-रे, एमआरआई और सीटी स्कैन सहित परीक्षणों से पता चला कि तनवीबेन को एंकिलॉजिंग स्पोंडिलोसिस नामक एक गंभीर और दुर्लभ बीमारी थी। सिविल अस्पताल के हड्डी रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ पीयूष मित्तल और उनकी टीम ने तन्वीबेन के ऑपरेशन का फैसला किया। 3 घंटे की सर्जरी के दौरान नस में चोट लगने की स्थिति में लकवे की आशंका के बीच लगातार न्यूरो मॉनिटरिंग की मदद से मरीज ने एक जटिल और जोखिम भरा ऑपरेशन किया गया। वर्तमान में तन्वीबेन आसानी से चल-फिर सकती हैं।
इस जटिल ऑपरेशन के बारे में डॉ पीयूष मित्तल का कहना है कि सर्जरी के दौरान हड्डी को काटा गया था। इस बीच हड्डियों को इस तरह से काटना था कि रीढ़ को नुकसान न पहुंचे और मनके को पूर्ववत करने के लिए पेंच को पिंजरे के साथ फिट करना पड़ा। इस समय सावधानी न बरतने पर रीढ़ की हड्डी के पास की नस कटने या घायल होने का खतरा था। फिलहाल न्यूरोमॉनिटरिंग की मदद से ये ऑपरेशन सफल रहा हैं।

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