अहमदाबाद: एम्बुलेंस एवं शववाहिनी नही मिलने पर पैदल रिक्शा में ले जाया जा रहा शव

पैदल रिक्शा में ले जाया जा रहा शव

राज्य में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या पिछले डेढ़ महीने से नए-नये रिकॉर्ड तोड़ रही है

राज्य में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या पिछले डेढ़ महीने से नए-नये  रिकॉर्ड तोड़ रही है। दूसरी लहर पहली से ज्यादा खतरनाक और जानलेवा साबित हो रही है। अस्पताल से लेकर श्मशान तक सभी जगहों पर लंबा इंतजार होता है। ऑक्सीजन और इंजेक्शन की कमी को दूर करने में प्रशासन भी हाफ रहा है। पिछले डेढ़ महीने से यही स्थिति है। 
स्वास्थ्य विभाग भी बढ़ती मौतों को लेकर चिंतित है। अहमदाबाद में एक ऐसी तस्वीर देखी गई, जिससे दिल कांप उठा। अहमदाबाद के वेजलपुर इलाके में शववाहिनी नहीं आने पर स्वजनों के मृतदेह को पैदल रिक्शे में रखकर श्मशान में ले जाने के लिए मजबूर हुए परिजन। वर्तमान में अहमदाबाद में स्थिति ऐसी है कि भले ही एक घंटे में ऑनलाइन भोजन उपलब्ध हो जाये, लेकिन 108 उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, शव वाह‌िनी भी समय पर नहीं पहुंच सकता। मरीजों को  भर्ती करने के लिए सिविल अस्पताल के परिसर में 50 से अधिक एम्बुलेंसों की लाइन देखी गई।
राजकोट के एक मरीज को उसके स्वजन ने  ऑक्सीजन देने के लिए नंगे पैर दौड़ गये।  बुधवार को सिविल अस्पताल में इतना लंबा इंतजार था कि मानो अहमदाबाद कोरोना का एपी सेंटर बन गया हो। उधर, मरीज के परिजन धनवंतरी अस्पताल में भर्ती होने के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं। टोकन सिस्टम को लेकर परिजन भी पुलिस टीम से भिड़ गए। टोकन लेने के लिए लोग सुबह से ही लाइन लगा दी थी। 
परिजनों को रोगी की रिपोर्ट दिखाकर टोकन लेना है। बहुत गंभीर परिस्थितियों वाले रोगियों को वरीयता दी जा रही है। वर्तमान स्थिति यह है कि अधिक रोगी और कम कर्मचारी हैं। सरकार ने 200 से अधिक कर्मचारियों की भर्ती करने की घोषणा की है लेकिन अभी तक कोई नया स्टाफ नहीं आया है। हालांकि, महामारी के इस समय में, ऐसे दृश्य हैं जहां मृत्यु का भी सम्मान नहीं किया गया है। दूसरी ओर श्मशान सूत्रों का कहना है कि लोग अपने परिजनों की अस्थियां लेने भी नहीं आते हैं और दाह संस्कार के बाद भी नहीं रुकते हैं। जिससे श्मशान में काम करने वाली टीम अस्थि इकट्ठा करती है।

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