अहमदाबाद : मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक सुधार के दृष्टिकोण के साथ राजस्व प्रक्रिया के सरलीकरण को दी प्राथमिकता

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य के सामान्य नागरिकों के हित में 14 राजस्व नियमों में किए महत्वपूर्ण नीति विषयक सुधार

 दान या परोपकार के उद्देश्य से भूमि परिवर्तन के मामले में स्टाम्प ड्यूटी में मिलेगी राहत 
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य के सामान्य लोगों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए राजस्व नियमों में नीति विषयक महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। इसमें दान-परोपकार के उद्देश्य से भूमि परिवर्तन, ट्रस्ट को आवंटित सरकारी जमीन के मामले में स्पष्टीकरण, संशोधित गैर-कृषि (रिवाइज्ड एनए) के समय पुनर्विचार से छूट, उत्तराधिकार को लेकर पड़ने वाली मुश्किलों का निवारण और लंबित पट्टों का रजिस्ट्रेशन जैसे महत्वपूर्ण मामलों से संबंधित नियमों में सुधार जैसे अहम निर्णयों का समावेश होता है। राजस्व मंत्री राजेन्द्र त्रिवेदी ने इन निर्णयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इन सुधारों के परिणामस्वरूप अब खेती की जमीन जब दान-परोपकार उद्देश्य से किसी भी सरकारी, अर्धसरकारी या स्थानीय निकाय के संस्थानों को बिना किसी वित्तीय लेनदेन के उपहार में दी जाएगी, तब वर्तमान स्टाम्प ड्यूटी के बजाय केवल 1000 रुपए की स्टाम्प ड्यूटी का ही भुगतान करना होगा। इसलिए पहले स्टाम्प ड्यूटी का जो बोझ था, वह अब नहीं रहेगा। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री के नीति विषयक निर्णय के अनुसार अब खातेदार की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार के दौरान बेटियों की संतानों को भी जंत्री की 4.90 फीसदी की दर से स्टाम्प ड्यूटी के बजाय केवल 300 रुपए की स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान करना होगा।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सरकार के हित की रक्षा के उद्देश्य से गाम नमूना नं. 7 में इस बात की स्पष्टता करने का निर्णय भी किया है कि राज्य सरकार द्वारा ट्रस्ट को आवंटित सरकारी जमीन के मामले में ट्रस्ट अधिनियम की धारा-36 तथा राजस्व विभाग या सरकार की मंजूरी आवश्यक है तथा प्रीमियम देय है। नई शर्त की सांथणी, गणोत धारा (काश्तकारी अधिनियम) के अंतर्गत माता-पिता को प्राप्त अथवा उत्तराधिकार के अधिकार से प्राप्त की गई जमीन, जिसमें केवल बड़े भाई का नाम ही हो, तो उनके अवसान होने की स्थिति में राजस्व अभिलेख में नियमानुसार कार्यवाही कर बाकी बचे भाई-बहनों के नाम भी राजस्व अभिलेख में दाखिल करने का किसान हितैषी निर्णय राज्य सरकार ने किया है। इसके परिणामस्वरूप पारिवारिक विवाद और असमंजसता की स्थिति दूर होगी।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राजस्व नियमों में जो नीति विषयक सुधार किए हैं उसके अनुसार अब, एक उद्देश्य के लिए गैर-कृषि (एनए) भूमि मिलने के बाद अन्य उद्देश्य के लिए गैर-कृषि के आवेदन (रिहायशी से वाणिज्य आदि) के दौरान प्रीमियम, जोनिंग, जीडीसीआर, एनए और शर्त उल्लंघन को छोड़कर अन्य किसी राय की आवश्यकता नहीं होगी। केवल रिवाइज्ड एनए के उद्देश्य की राय ही आवश्यक होगी। मुख्यमंत्री ने पटवारी द्वारा ग्रामीण या शहरी क्षेत्र के मकान, फ्लैट, दुकान और कार्यालयों के पीढ़ीनामा बनाना लोगों के लिए आसान कर दिया है। निवास स्थान या पैतृक स्थल के अलावा अन्य स्थान पर व्यक्ति का निधन होने पर मृतक के स्थायी निवास या पैतृक स्थल के पटवारी के मार्फत पीढ़ीनामा बनाने का महत्वपूर्ण निर्णय किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने यह जनहितैषी निर्णय भी किया है कि खेती की जमीन गैर-कृषि होने के बाद यदि प्रॉपर्टी कार्ड न बना हो, तो ऐसे मामले में गैर-कृषि का आदेश प्रस्तुत कर प्रॉपर्टी कार्ड बनाने और उसमें क्रमशः बदलाव दर्ज किए जा सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने यह निर्णय भी किया है कि खेती की जमीन के हक दावे के संदर्भ में अनावश्यक टाइटल के विवाद को टालने के लिए ऐसे दावों के संदर्भ में यदि कोई स्टे ऑर्डर न हो, तब लंबित दावों (लीज पेंडेंसी) को गाम नमूना-7 में दर्ज नहीं किया जाएगा और सबरजिस्ट्रार द्वारा लीस पेंडेंसी का पंजीकरण नहीं किया जाएगा। राजस्व मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने फलदार वृक्ष तथा अन्य वृक्ष लगाने के लिए किराए पर दी गई जमीन के अधिकतम उपयोग तथा पट्टेदार की आजीविका में बढ़ोतरी को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ऐसी जमीनों पर खेती करने की मंजूरी देने का महत्वपूर्ण निर्णय किया है। इसके परिणामस्वरूप खेत उत्पादन में बढ़ोतरी होगी और सीमित प्राकृतिक संसाधन के रूप में उपलब्ध जमीन का अधिकतम उपयोग संभव होगा। इस जमीन पर खेती करने के कारण पट्टेदार को किसान का दर्जा नहीं मिलेगा। इसके अलावा, उन्होंने सिटी सर्वे रिकॉर्ड, अधिकार की जांच, प्रमोलगेशन क्षति सुधार की अवधि 31 दिसंबर, 2023 तक बढ़ाने का निर्णय किया है।
मुख्यमंत्री ने हिस्सा पैमाइश के पेचीदा मुद्दे का निराकरण करने के लिए जमीन के उप-विभाजन अर्थात हिस्सा पैमाइश के मामले में यदि सह कब्जेदारों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो ऐसे मामले में हितधारक पक्षकारों को दो बार दस-दस दिनों की नोटिस देने के बाद भी यदि कोई पक्षकार सहमत नहीं होता, तो सर्वे नंबर की हिस्सा पैमाइश करन का निर्णय किया है। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के सीमा पर स्थित बाड़े को निश्चित मूल्य वसुलकर नियमित करने का सैद्धांतिक निर्णय भी किया है। इस निर्णय से 
ग्रामीण क्षेत्र के लगभग 5 से 6 लाख लोगों तथा शहरी क्षेत्र के व्यापक वर्ग को बड़ा लाभ होगा। मुख्यमंत्री ने राजस्व सेवाओं में सुशासन का दृष्टिकोण अपनाते हुए अन्य दो अन्य निर्णय भी किए हैं। तदअनुसार, काश्तकारी अधिनियम की धारा 43/63 की मंजूरी के बाद गैर कृषि (एनए) अनुमति की अवधि दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष तथा गैर कृषि उपयोग की अवधि को दूर करने का जनहितकारी निर्णय किया है। इसके अलावा, काश्तकारी अधिनियम की धारा 32-एम के अंतर्गत क्रय मूल्य के भुगतान की समय सीमा को 31 दिसंबर, 2024 तक बढ़ाने का निर्णय भी किया गया है।
राजस्व मंत्री ने कहा कि शहरों में सिटी सर्वे है, जहां गैर कृषि (एनए) की संपत्तियों के दस्तावेजों के पंजीकरण के समय अनिवार्य प्रमाण के कारण नागरिकों को होने वाली कठिनाई को हल करने के लिए राज्य सरकार ने सकारात्मक निर्णय किया है। जिसमें, गैर कृषि का आदेश, बीयू परमिशन और ले-आउट प्लान आदि दस्तावेजी प्रमाणों को दस्तावेज के पंजीकरण के समय अनिवार्य नहीं माना जाएगा। इसके अतिरिक्त, गामतल की जमीन में गैर कृषि करने का प्रावधान नहीं होने के कारण, ऐसी जमीनों का गैर कृषि आदेश उपलब्ध नहीं होता, इसलिए इसमें भी छूट दी जाएगी। इसके निराकरण के लिए ये प्रमाण पुराने मकानों के संदर्भ में अनिवार्य नहीं माने जाएंगे।

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