19 वर्षीय बबिता बनी 1000 महिलाओं के लिए प्रेरणा, सबने मिलकर 107 मीटर पहाड़ काट के गाँव में पहुँचाया पानी

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107 मीटर ऊंचे पहाड़ को काटा, 100 महिलाओं ने 18 महीने में पूर्ण किया काम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी के आखिरी रविवार को मन की बात कार्यक्रम के जरिए देशवासियों से बात की। इस बीच, उन्होंने जल संरक्षण पर बात की और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड की निवासी बबीता राजपूत की प्रशंसा की। इसके लिए बबीता ने पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। दरअसल मध्यप्रदेश के छतरपुर के बिलेदा गाँव की महिलाओं ने जो काम किया है, उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि महिलाओं को शक्ति का रूप क्यों कहा जाता है।
आपको बता दें कि इस गाँव की महिलाओं ने एक पहाड़ काटकर झील को नहर से जोड़ा। इस काम के लिए उन सभी की प्रेरणा बनी थी 19 वर्षीय बबिता राजपूत। जिसकी कल पीएम मोदी ने तारीफ की।  परमार्थ एनजीओ के सहयोग से 100 से अधिक महिलाओं ने पानी बचाने के लिए 107 मीटर ऊंचे पहाड़ को काट दिया है, इस भागीरथी काम से अब आसानी से गांव की झील को पानी से भरा जा सकता है और इससे गांव में समृद्धि आ रही है।
पहाड़ की वजह से बारिश का पानी होता था बेकार
आपको बता दें कि पहले पहाड़ों पर होने वाले बारिश का सारा पानी बर्बाद हो जाता था और इस वजह से 10 साल पहले बुंदेलखंड पैकेज के तहत एकर में बनी झील तक बारिश का पानी नहीं पहुंच रहा था और झील खाली हो गई थी। बबीता राजपूत ने तब गाँव की महिलाओं को प्रेरित किया और वन विभाग के साथ बात करके 107 मीटर ऊंचे पहाड़ को तोड़ दिया। अब गाँव के तालाब में भी पानी है और सूखे कुएँ में भी।
इसके अलावा जो हैंडपंप सूख गए थे, उनमें भी पानी आना शुरू हो गया है। इस असंभव जैसे काम में 100 से अधिक महिलाओं ने 18 महीनों काम किया और गांव के लोगों को उनकी खुशी लौटा दी। प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा कि बबीता बुंदेलखंड के एक राजपूत गांव में रहती हैं। उसके गाँव के पास एक बड़ी झील थी, जो सूख चुकी थी। वह गांव की अन्य महिलाओं को साथ ले गया और झील में पानी लाने के लिए एक नहर का निर्माण किया। इस नहर से बारिश का पानी सीधे झील में बहने लगा और अब झील पानी से भर गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार की नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है और देश के नागरिकों को इसे बचाने की जिम्मेदारी समझनी चाहिए ताकि हम अपनी अगली पीढ़ी को एक स्वच्छ और सुंदर भविष्य दे सकें।

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