गर्मी के मौसम में किसान मिट्टी का करें सौरीकरण, स्वस्थ रहेगी मिट्टी

रासायनिक कीटनाशक के माध्यम से भोजन भी जहरीला होता जा रहा है

गर्मी के मौसम में किसान मिट्टी का करें सौरीकरण, स्वस्थ रहेगी मिट्टी


पूर्वी चंपारण,08 मई(हि.स.)।पूर्वी चंपारण जिले के कृषि विज्ञान केंद्र परसौनी के मृदा वैज्ञानिक डॉ.आशीष राय ने हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में बताया कि जलवायु परिवर्तन की दौर में मिट्टी में कई हानिकारक कीट पनपने लगे है,जो फसल को रोगग्रस्त बनाकर उत्पादन को प्रभावित कर रहे हैं।

वैज्ञानिक डॉ राय ने बताया कि इसकी रोकथाम के लिए किसान भाई रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग करते हैं,जो इन रोगों को स्थायी रूप से समाप्त नही करता बल्कि उल्टे मिट्टी में रहने वाले लाभदायक सूक्ष्म जीवों को नुकसान पहुंचता है।

डॉ राय ने बताया कि इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी नुकसान होता है। दूसरी तरफ रासायनिक कीटनाशक के माध्यम से भोजन भी जहरीला होता जा रहा है। ऐसे में किसान भाई गर्मी के मौसम में सूर्य की रोशनी से मिट्टी में छिपे हानिकारक व रोगजनक कीटों के साथ खरपतवार से भी मुक्ति पा सकते हैं। इस प्रक्रिया को मृदा सौरीकरण तकनीक कहते हैं।

डॉ.आशीष राय ने बताया कि मृदा जनित रोग-कीटों का प्रभाव किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। जमीन में छिपे हानिकारक कीटों के अण्डे, प्यूपा और निमेटोड खेतों में लगे फसल को नुकसान कर रहे हैं जिससे फसल उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ऐसे में मई-जून की गर्मी के मौसम में मृदा सौरीकरण तकनीक से भूमी में छिपे कीट और खरपतवारों से बहुत ही सस्ते तरीके से निजात पाया जा सकता है।

कैसे करें मिट्टी का सौरीकरण

इस प्रक्रिया में सबसे प्रमुख कार्य खेत की गहरी जुताई करते हैं जिससे मिट्टी के नीचे रहने वाले हानिकारक कीटों का हैबिटाट नष्ट होता है। जब तेज धूप और तापमान 40-45 सेंटीग्रेड हो उस वक्त सॉयल सोलेराइजेशन करना उचित होता है इसके लिए मई-जून का महीना सबसे उपयुक्त होता है। मृदा सौरीकरण के लिए ऊंचाई वाले खेतों में बुवाई के 4-6 सप्ताह पहले छोटी-छोटी क्यारियां बनाएं और जुताई करके पारदर्शी प्लास्टिक से ढकें फिर प्लास्टिक के किनारों को मिट्टी से ठीक तरह से दबाएं। जिससे बाहर की हवा अंदर प्रवेश न कर सके।फिर इसे 3-4 सप्ताह तक छोड़ दें। इस प्रकार बिना किसी रसायन के उपयोग के भूमि जनित कीट रोगों और खरपतवारों से छुटकारा मिलता सकता है। किसान भाई धान की नर्सरी, फलों और सब्जियों की पौधशाला के लिए इसका प्रयोग कर सकते है।

बरते सावधानी

इस विधि के प्रयोग के पूर्व खेत में फसल अवशेष न रखे। पॉलिथीन से ढकने के पूर्व मिट्टी को पलटकर समतल और भुरभुरी बना ले।साथ ही सिंचाई कर खेत में नमी बना लें और नमी के साथ गर्मी को रोकने के लिए पॉलिथीन किनारों को अच्छी तरह से सूखाकर मिट्टी से ढंके।

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