अहमदाबाद : कचरा डंप साइट पर जडेश्वर, अहमदाबाद में जंगल का निर्माण

अहमदाबाद : कचरा डंप साइट पर जडेश्वर, अहमदाबाद में जंगल का निर्माण

इस क्षेत्र में पांच वर्षों में 140.30 टन कार्बन की अनुमानित कमी

अहमदाबाद के ओढव क्षेत्र में जडेश्वर वन राज्य का पहला ऐसा जंगल है जो 'डंपिंग साइट' पर बनाया गया है। ओढव में अहमदाबाद नगर निगम के कचरा संग्रहण केंद्र के पास 8.5 हेक्टेयर बंजर भूमि जहां पहले आसपास के क्षेत्र का कचरा डंप किया गया था। यह 8.5 हेक्टेयर भूखंड वृक्षारोपण एवं विकास के लिए वन विभाग को आवंटित किया गया था, जहां वर्ष 2019 में वन विभाग द्वारा 'जडेश्वर सांस्कृतिक वन' का निर्माण किया गया है। आज जाडेश्वर जंगल अहमदाबाद शहर के लिए ही नहीं बल्कि पूरे राज्य के लिए एक आदर्श वन बन गया है। इस बारे में बात करते हुए अहमदाबाद के उप वन संरक्षण सामाजिक वनिकरण विभाग की डॉ. सक्कीरा बेगम ने कहा कि जडेश्वर सांस्कृतिक वन अहमदाबाद शहर के मध्य में वन विभाग द्वारा बनाया गया पहला सांस्कृतिक वन है। वन विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धि के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि जडेश्वर वन देश का पहला ऐसा वन है जिस पर डाक विभाग के सहयोग से वन विभाग ने विशेष कवर भी शुरू किया है।
इस सांस्कृतिक जंगल का उद्देश्य स्थानीय पेड़ों के लिए एक पिकनिक स्थल बना रहे इसके लिए डंपिंग यार्ड से एसेट बनाने के उद्देश्य से बनाया गया है।  इस सांस्कृतिक जंगल में लगाए गए पेड़ और फूल 5 साल में 140.30 टन कार्बन और 10 साल में 188.40 टन कार्बन सोखने का अनुमान है। इस प्रकार यह सांस्कृतिक वन क्षेत्र के फेफड़ों का कार्य करता है और इतनी बड़ी संख्या में वृक्षों के माध्यम से इस क्षेत्र में जल को जमीन में उतारने की प्रक्रिया को गति मिलेगी।
सक्कीरा बेगम ने जडेश्वर वन के बारे में कहा कि, इस भूखंड में कुल 2,85,986 से अधिक फूल वाले पौधे और पेड़-पौधे के साथ-साथ विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधे और अन्य प्रकार की वनस्पतियां लगाई गई हैं। यहां अलग-अलग 22 प्रखंडों में अलग-अलग रंगों की अलग-अलग किस्मों के पेड़ लगाए गए हैं जो हर मौसम में फूल देते हैं। इतना ही नहीं इसका लुत्फ उठाने के लिए बीच-बीच में करीब 4.5 किमी का पैदल रास्ता भी बनाया गया है।
जब नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत थे, तब वर्ष 2004 से प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक वन की स्थापना की एक नई पहल और परंपरा शुरू हुई। इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2021 तक प्रदेश में कुल 21 सांस्कृतिक वनों की स्थापना की जा चुकी है। सर्वप्रथम सांस्कृतिक वन का निर्माण वर्ष 2004 में गांधीनगर में किया गया था और इसे आज पुनीत वन के नाम से जाना जाता है।
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