भारत के इस इलाके में से मिला निपाह वायरस, वैज्ञानिकों के दावों से परेशान हुये लोग

महाबलेश्वर की गुफाओं में से मिले चमगादड़ों के सैंपल में पाया गया वायरस

देश भर में कोरोना वायरस की दूसरी लहर धीमी पड़ रही है। ऐसे में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरियंट का जोखिम काफी बढ़ रहा है। ऐसे में पूना की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलोजी (NIV) के वैज्ञानिकों ने पहली बार महाराष्ट्र में चमगादड़ों की दो प्रजातियों में से खतरनाक निपाह वायरस की एंटीबोडी ढूंढ निकाली है। NIV के वैज्ञानिकों ने महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में से मिल आए थे। इन चमगादड़ों का सैंपल वैज्ञानिकों ने मार्च 2020 में लिए थे। NIV के मुख्य संशोधक डॉक्टर प्रागता यादव ने इस बारे में बताया की इसके पहले महाराष्ट्र में कही से भी निपाह वायरस नहीं मिला था। 
बता दे की भारत में अब तक चार बार निपाह वायरस देखने मिला है। पहली बार यह वायरस साल 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में में मिल आया था। इसके बाद साल 2007 में पश्चिम बंगाल के नदिया में इस वायरस ने दस्तक डी थी। इसके बाद तीसरी बार यह वायरस केरल में दिखा था, जहां वायरस के संक्रमण के कारण 18 लोगों की मौत हो गई थी। 
वायरस के संपर्क में आने के मात्र 4 से 14 दिनों के अंदर व्यकित में वायरस के लक्षण दिखाई देने लगते है। अमेरिकन सेंटर फॉर डिसिज कंट्रोल द्वारा बाटाए गए लक्षणों के अनुसार, बुखार, सर दुखना, गले में दर्द होना, सांस लेने में तकलीफ होना उयर उल्टियाँ होना शामिल है। इसके अलावा गंभीर रुप से संक्रमित मरीजों में उदासी, बैचेनी जैसे लक्षण भी दिखाई देते है। 
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