गोल्ड हासिल करने के लिए नीरज ने की कड़ी मेहनत, छह महीनों से छोड़ दी थी मिठाई

गोल्ड हासिल करने के लिए नीरज ने की कड़ी मेहनत, छह महीनों से छोड़ दी थी मिठाई

कभी-कभार पानीपूरी खाने से नहीं पड़ता खिलाड़ियों के स्वास्थ्य पर कोई भी असर

टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत के गोल्डन बॉय नीरज ने एथलेटिक्स में भारत का 100 साल का सूखा खत्म किया था। पर इसके लिए नीरज ने काफी मेहनत की थी। भाला फेंक में 87.58 मीटर दूर भाला फेंक कर नीरज ने ओलंपिक का स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। गोल्ड मेडल विजेता नीरज ने बताया कि उन्हें पानीपूरी खाना काफी पसंद है और पानीपूरी खाने से एथलीट को कोई नुकसान नहीं होता। 
साल 2018 में हुये कॉमनवेल्थ गेम्स चैम्पियन नीरज ने बताया कि पानीपूरी खाने से किसी भी एथलीट को कोई नुकसान नहीं होता। क्योंकि उसमें पानी का प्रमाण अधिक होता है। इसमें अधिक आटा नहीं होता, जिससे शरीर पर कोई प्रभाव नही होता। पानीपूरी खाने से शरीर में मात्र पानी ही बढ़ता है। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि हर दिन पानीपूरी खाने कि बात नहीं कर रहा। पर कभी-कभी खाने से खिलाड़ियों के फिटनेस पर कोई फर्क नहीं पड़ता। 
पानीपूरी के अलावा नीरज को माता के हाथ से बना चूरमा भी काफी पसंद है। जिसके लिए वह कभी-कभी चुस्त डाएट प्लान के साथ कभी-कभी छुट ले लेते है। नीरज कि बहन ने बताया कि उसकी बहन को मिठाई काफी पसंद है। पर ओलंपिक के 6 महीने पहले ही नीरज ने मिठाई खाना बंद कर दिया था। 
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