भारत के 14 लाख एसटीईएम ग्रेजुएट देश की सबसे बड़ी ताकत: पीयूष गोयल
गांधीनगर, 17 मई (वेब वार्ता)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को कहा कि भारत में हर साल निकलने वाले करीब 14 लाख एसटीईएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) ग्रेजुएट देश की तकनीक, विनिर्माण और नवाचार क्षमता की सबसे बड़ी ताकत बन चुके हैं।
गांधीनगर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन (एनआईडी) में इनोवेशन और इनक्यूबेशन सेंटर के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि भारत के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की बढ़ती संख्या वैश्विक निवेश को आकर्षित कर रही है और उभरते उद्योगों में देश की स्थिति मजबूत कर रही है।
उन्होंने कहा, “जब मैं विदेशी मंत्रियों को बताता हूं कि भारत हर साल करीब 14 लाख एसटीईएम ग्रेजुएट तैयार करता है, तो वे हैरान रह जाते हैं। युवाओं की यही विशाल शक्ति भारत की सबसे बड़ी ताकत है।”
कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद रहे।
पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि एनआईडी जैसे संस्थान देश के युवाओं को “जॉब सीकर्स” नहीं बल्कि “जॉब क्रिएटर” बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि डिजाइन, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप विकसित भारत की नई पहचान बनने जा रहे हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह संस्थान भारत की क्रिएटिव प्रतिभाओं को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाएगा और “भारत में डिज़ाइन किया गया” को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
गोयल ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और यहां दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित हो चुका है। उन्होंने कहा कि देश में 5जी नेटवर्क का तेज विस्तार और सस्ता इंटरनेट डिजिटल अवसरों को गांव-गांव तक पहुंचा रहा है।
उन्होंने कहा कि अब इनोवेशन केवल महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों के युवा भी स्टार्टअप शुरू कर वैश्विक कारोबार खड़े कर रहे हैं।
मंत्री ने कहा, “आज कई युवा इनोवेटर्स को अपने आइडिया को आगे बढ़ाने के लिए केवल लैपटॉप, डिजिटल कनेक्टिविटी और सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है।”
उन्होंने बताया कि भारत में करीब 1,700 से 1,800 वैश्विक कंपनियां अपने वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसीएस) के जरिए इनोवेशन और डिजाइन का काम कर रही हैं। इसके पीछे भारत की कुशल कार्यशक्ति, सस्ती डिजिटल कनेक्टिविटी और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर बड़ी वजह है।
गोयल ने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था सस्ते श्रम पर नहीं, बल्कि ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्किल्ड मैनपावर, क्रिएटिव डिजाइन और इनोवेशन पर आधारित होगी।
उन्होंने छात्रों से सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, क्वांटम कंप्यूटिंग, डीप टेक और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया।
साथ ही उन्होंने शिक्षा संस्थानों और उद्योग जगत के बीच बेहतर सहयोग की जरूरत बताते हुए कहा कि संस्थानों को छात्रों के रचनात्मक विचारों को व्यावसायिक उत्पाद और उद्यमिता में बदलने में मदद करनी चाहिए।
