बामनवाली में ‘बहन-बेटी सम्मेलन’ की अनोखी छटा, पीहर पहुंचीं बेटियों से भावुक हुआ गांव
बरसों बाद मिलन की खुशी, लोक संस्कृति और रिश्तों की गर्माहट से महका गांव का माहौल
राजस्थान के बीकानेर जिला के लून करनसर तहसील के बामनवाली गांव में आगामी 9 और 10 मई को आयोजित होने जा रहे ऐतिहासिक ‘बहन-बेटी सम्मेलन’ को लेकर पूरे गांव में उत्साह और भावनात्मक माहौल देखने को मिल रहा है। गांव की गलियां अपनी बेटियों और बहनों के स्वागत के लिए सजी हुई हैं, वहीं वर्षों बाद पीहर पहुंचीं बुआओं और बहनों की आंखों में अपनों से मिलने की खुशी साफ झलक रही है।
स्वर्गीय खेताराम जी और स्वर्गीय गोमतीदेवी की स्मृति में उनके पुत्र तोलाराम, बीरूराम और भवानीशंकर सारस्वा द्वारा श्रीमद्भागवत कथा एवं बहन-बेटी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। श्रीमद्भागवत सप्ताह की पूर्णाहुति 9 मई को होगी, जबकि दो दिवसीय बहन-बेटी सम्मेलन का समापन 10 मई को सभी बहनों और बेटियों को उपहार भेंट कर सम्मान के साथ विदाई किया जाएगा।
सम्मेलन के चलते गांव में रिश्तों की गर्माहट और अपनत्व का अनूठा दृश्य देखने को मिल रहा है। गांव के आंगनों में वर्षों बाद एकत्रित हुई बुजुर्ग बुआएं और बहनें जब एक-दूसरे से मिलीं, तो कई आंखें नम हो गईं। किसी ने बचपन की यादें ताजा कीं तो किसी ने अपने माता-पिता और पुराने दिनों को याद कर भावुक पल साझा किए।
रंग-बिरंगे घाघरे-लुगड़ी और पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाएं गांव की लोक संस्कृति को जीवंत करती नजर आईं। घरों में बैठकों का दौर चल रहा है, जहां पुरानी कहानियां, लोकगीत और हंसी-ठिठोली से पूरा माहौल पारिवारिक उत्सव में बदल गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बेटियों के गांव लौटने से पूरे बामनवाली में नई रौनक आ गई है। लोगों के अनुसार यह सम्मेलन केवल एक सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि उन बेटियों और बहनों के सम्मान का प्रतीक है जिन्होंने इसी मिट्टी में जन्म लेकर आज विभिन्न परिवारों और समाजों को रोशन किया है।
सम्मेलन में दादी, नानी, पोती और दोहितियों का एक साथ मिलना पीढ़ियों के संगम का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा है। गांव के हर घर में मेहमाननवाजी के साथ पीहर का वही पारंपरिक स्नेह और दुलार परोसा जा रहा है, जिसकी चाह हर बेटी के मन में हमेशा बनी रहती है।
ईको भारत के संस्थापक एवं मुख्य आयोजक सम्पत सारस्वत बामनवाली ने कहा कि यह ‘बहन-बेटी सम्मेलन’ समाज को अपनी जड़ों और बेटियों से जुड़े रहने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि गांव की हर गली और हर घर बेटियों के स्वागत में पलकें बिछाए खड़ा है। सम्मेलन समाप्त होने के बाद जब ये बहनें और बेटियां विदा होंगी, तो वे अपने साथ यादों और अपनत्व का ऐसा खजाना लेकर जाएंगी, जो उन्हें अगले मिलन तक भावनात्मक रूप से जोड़े रखेगा।
