बैडमिंटन के इतिहास में सबसे बड़ा क्रांतिकारी बदलाव, अब 21 के बजाय 15 अंकों का होगा खेल
बीडब्ल्यूएफ ने नए स्कोरिंग सिस्टम ‘3×15’ पर लगाई अपनी मुहर
डेनमार्क, 27 अप्रैल (वेब वार्ता)। बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन ने खेल के इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव करते हुए नए स्कोरिंग सिस्टम को आधिकारिक मंजूरी दे दी है।
डेनमार्क के हॉर्सेंस में आयोजित वार्षिक आम बैठक में दो-तिहाई बहुमत के साथ यह फैसला लिया गया कि अब अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन मैच 21 अंकों के बजाय 15 अंकों के तीन गेम के आधार पर खेले जाएंगे। यह नया नियम 4 जनवरी 2027 से पूरी दुनिया में प्रभावी होगा।
इस फैसले के साथ ही लगभग दो दशकों से चले आ रहे ‘3×21’ फॉर्मेट का अंत हो जाएगा, जिसने साल 2006 में पुराने स्कोरिंग सिस्टम की जगह ली थी।
बीडब्ल्यूएफ की अध्यक्ष खुनयिंग पटामा लीस्वाडत्राकुल ने इस ऐतिहासिक फैसले को बैडमिंटन के भविष्य के लिए एक मील का पत्थर बताया है। उन्होंने तर्क दिया कि 15 अंकों का छोटा फॉर्मेट न केवल मैचों को अधिक रोमांचक और दबावपूर्ण बनाएगा, बल्कि इससे मैच की अवधि भी अधिक अनुमानित रहेगी।
फेडरेशन का मानना है कि छोटा फॉर्मेट खिलाड़ियों के शारीरिक भार को कम करेगा, जिससे उनकी रिकवरी बेहतर होगी और खिलाड़ियों का करियर लंबा हो सकेगा। इस बदलाव का उद्देश्य नई पीढ़ी के दर्शकों को खेल से जोड़ना और ब्रॉडकास्टिंग के लिहाज से इसे अधिक गतिशील बनाना है।
भले ही अंकों की संख्या कम कर दी गई है, लेकिन बीडब्ल्यूएफ ने स्पष्ट किया है कि खेल का मूल स्वरूप, कौशल, और रणनीतियां वैसी ही बनी रहेंगी। नए नियमों के तहत 14-14 की बराबरी होने पर 2 अंकों की बढ़त जरूरी होगी, जबकि अधिकतम अंक सीमा 21 तय की गई है (यानी 20-20 होने पर 21वां अंक जीतने वाला गेम जीतेगा)।
हालांकि, साइना नेहवाल जैसे कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों ने खेल के पारंपरिक चरित्र को लेकर चिंताएं व्यक्त की हैं, लेकिन फेडरेशन ने आश्वस्त किया है कि यह नवाचार वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बैडमिंटन की साख को और अधिक मजबूत करेगा।
