सूरत : तेज गर्मी के बीच वोटिंग का जोश, 59.31% शांतीपूर्ण मतदान, 483 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद
कल 28 अप्रैल को चुनाव परिणामों पर टिकी निगाहें, आंजणा-डुंभाल, लिंबायत-उधनायार्ड में सबसे ज्यादा मतदान
सूरत। सूरत शहर में रविवार, 26 अप्रैल 2026 को सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के 30 वार्डों की 120 सीटों के लिए मतदान शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। इस चुनाव में कुल 483 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद हो गई। कड़ी गर्मी और 41.6 डिग्री तापमान के बावजूद मतदाताओं में उत्साह देखने को मिला और शाम 6 बजे तक करीब 59.31% मतदान दर्ज किया गया।
इस बार मतदान प्रतिशत पिछले चुनाव की तुलना में अधिक रहा। 2021 के चुनाव में जहां 47.14% मतदान हुआ था, वहीं इस बार 24.76 लाख में से 14.68 लाख से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। इनमें 8.17 लाख पुरुष और 6.51 लाख महिला मतदाता शामिल रहे।

सबसे अधिक मतदान आंजणा-डुंभाल, लिंबायत-उधनायार्ड जैसे क्षेत्रों में दर्ज किया गया, जबकि पूना, करंज, भटार, वेसू डुमस क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम मतदान हुआ। कुछ स्थानों पर ईवीएम में तकनीकी खराबी की शिकायतें भी सामने आईं, जिससे मतदान प्रक्रिया थोड़ी प्रभावित हुई, हालांकि प्रशासन ने स्थिति को जल्द नियंत्रित कर लिया।
राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने भी मतदान किया। सूरत जिला कलेक्टर एवं मुख्य चुनाव अधिकारी डॉ. सौरव पारधी (आईएएस) राज्य के डिप्टी चीफ मिनिस्टर हर्ष संघवी ने अपनी पत्नी के साथ मतदान किया। सांसद एवं केन्द्रिय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटील ने भी परिवार के सदस्यों के साथ मतदान किया और लोगों से अधिक से अधिक संख्या में वोट देने की अपील की। इसके अलावा शहर भाजपा अध्यक्ष परेश पटेल और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
मतदान के दौरान कई प्रेरणादायक दृश्य भी सामने आए। 91 वर्षीय बुजुर्ग से लेकर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों तक ने मतदान कर लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई। वहीं, कुछ युवाओं ने शादी की रस्मों के बीच मतदान कर नागरिक कर्तव्य को प्राथमिकता दी।
पहली बार वोट देने वाले युवाओं में विकास और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर स्पष्ट सोच दिखाई दी। आईटी सेक्टर में काम करने वाले युवा मतदाताओं ने बेहतर रोजगार और कार्य संस्कृति की उम्मीद के साथ वोट डाला।
शाम 6 बजे मतदान समाप्त होने के बाद ईवीएममशीनों को सील कर सुरक्षित रख दिया गया। अब सभी की निगाहें 28 अप्रैल को आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी हैं, जो सूरत की आगामी राजनीतिक दिशा तय करेंगे।
