ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान

परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से किया साफ इनकार: डील न होने पर सैन्य कार्रवाई की दी सख्तnचेतावनी

ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान

वॉशिंगटन, 24 अप्रैल (वेब वार्ता)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य गतिरोध के बीच परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावनाओं को पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया है।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से चर्चा के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि परमाणु हथियारों का उपयोग कभी किसी को नहीं करना चाहिए और वह ईरान के खिलाफ ऐसे घातक हथियारों का सहारा नहीं लेंगे।

हालांकि, उन्होंने यह जरूर साफ किया कि उनका मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकना है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका का वर्तमान में ‘होर्मुज स्ट्रेट’ पर पूरा नियंत्रण है और ईरान पर दबाव बनाने के लिए इसे रणनीतिक रूप से बंद रखा गया है, ताकि वह तेल व्यापार से आय न कर सके।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास तेल की प्रचुर मात्रा है और उसे अब होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वे रूस और सऊदी अरब के संयुक्त उत्पादन से भी अधिक तेल बना रहे हैं।

राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि यदि ईरान एक ठोस समझौते (डील) के लिए तैयार नहीं होता है, तो बाकी बचे 25 प्रतिशत सैन्य लक्ष्यों को भी नष्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि समय का दबाव अमेरिका पर नहीं बल्कि ईरान पर है, क्योंकि तेल का निर्यात रुकने से उनका बुनियादी ढांचा चरमरा रहा है।

ट्रंप ने जोर देकर कहा कि वे किसी जल्दबाजी में नहीं हैं और एक ऐसा स्थाई समझौता चाहते हैं जिससे भविष्य में ईरान कभी परमाणु हथियार विकसित न कर सके।

राजनयिक तनाव के बीच ट्रंप ने एक मानवीय सफलता का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अमेरिका के नैतिक अनुरोध पर ईरान 8 युवतियों की फांसी रोकने और उन्हें रिहा करने पर सहमत हो गया है।

मध्य पूर्व में शांति के सवाल पर उन्होंने कहा कि हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को दी जाने वाली फंडिंग बंद करना ईरान के लिए अनिवार्य शर्त होगी। ट्रंप ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि अमेरिकी सेना ने पहले ही ईरान के अधिकांश महत्वपूर्ण ठिकानों को निष्क्रिय कर दिया है और अब वे आराम से बैठकर समझौते का इंतजार कर रहे हैं।

इस बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका कड़े प्रतिबंधों और सैन्य दबाव के जरिए ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की रणनीति अपना रहा है।