सूरत : स्व. समझुबेन वेकरिया का नेत्रदान व देहदान, समाज के लिए बना प्रेरणादायक उदाहरण

लायन्स इंटरनेशनल, रेड क्रॉस व लोक दृष्टि आई बैंक के सहयोग से संपन्न हुआ पुनीत कार्य

सूरत : स्व. समझुबेन वेकरिया का नेत्रदान व देहदान, समाज के लिए बना प्रेरणादायक उदाहरण

मानव सेवा और समाज कल्याण की दिशा में एक अनुकरणीय पहल करते हुए वेकरिया परिवार की स्वर्गीय समझुबेन वेकरिया का नेत्रदान एवं देहदान सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। यह पुण्य कार्य लायन्स इंटरनेशनल 3232 F-2, इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी चोर्यासी शाखा तथा लोक दृष्टि आई बैंक के संयुक्त सहयोग से किया गया।

स्व. समझुबेन मूल रूप से अमरेली जिले के सूरजपुरा गांव की निवासी थीं। उनके निधन के उपरांत परिवार द्वारा लोक दृष्टि चक्षु बैंक के प्रमुख डॉ. प्रफुल्लभाई शिरोया को सूचना दी गई, जिसके बाद उनके नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की गई।

परिवार के सदस्य छगनभाई कल्याणभाई वेकरिया, रमेशभाई कल्याणभाई वेकरिया, नानुभाई कल्याणभाई वेकरिया की उपस्थिति में, स्व. शामजीभाई के आशीर्वाद से तथा डॉ. कनुभाई छगनभाई वेकरिया, डॉ. नीरवभाई छगनभाई वेकरिया, डॉ. जयाबेन नीरवभाई वेकरिया, प्रियंक नीरवभाई वेकरिया, विभाबेन कनुभाई वेकरिया, प्रणय कनुभाई वेकरिया एवं वैषु कनुभाई वेकरिया की प्रेरणा और समझ से यह अनमोल कार्य संपन्न हुआ।

डॉ. प्रफुल्ल शिरोया ने बताया कि नेत्रदान के माध्यम से दो जरूरतमंद व्यक्तियों को नेत्र प्रत्यारोपण का लाभ मिलेगा। 72 घंटों के भीतर कॉर्निया प्रत्यारोपण कर दृष्टिबाधित लोगों के जीवन में नई रोशनी लाई जाएगी।

वहीं, देहदान इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, चोर्यासी शाखा द्वारा स्मीमेर मेडिकल कॉलेज को सौंपा गया, जिससे मेडिकल विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना के अध्ययन और शोध में सहायता मिलेगी। इससे भविष्य के चिकित्सकों को प्रशिक्षण प्राप्त होगा और वे बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकेंगे।

स्मीमेर मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग की डॉ. दीपा गुप्ता, डॉ. मंजु सिंघल, डॉ. अमरदीप बिस्सा सहित अन्य चिकित्सकों व कर्मचारियों ने देहदाता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर लोक दृष्टि चक्षु बैंक और लायंस क्लब के सदस्यों ने भी परिवार के इस प्रेरणादायक निर्णय की सराहना करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

वेकरिया परिवार ने पारंपरिक रस्मों को सरल रखते हुए समाज को यह संदेश दिया कि “जीवन में रक्तदान और मृत्यु के बाद नेत्रदान व अंगदान” सबसे श्रेष्ठ दान है। उनका यह कदम समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गया है।

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