आरबीआई ने पेश की वित्त वर्ष 2026-27 की पहली मौद्रिक नीति
रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर रखा स्थिर, वैश्विक तनाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर दिया जोर
मुंबई, 08 अप्रैल (वेब वार्ता)। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए नीतिगत रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है।
मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के बाद सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया गया। गवर्नर ने बताया कि एमपीसी ने अपना रुख ‘तटस्थ’ बनाए रखा है, जिसका अर्थ है कि स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) 5.00 प्रतिशत और बैंक
रेट 5.50 प्रतिशत पर बरकरार रहेंगे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताएं और भू-राजनीतिक तनाव चरम पर हैं।
गवर्नर ने अपने संबोधन में विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष (इजरायल-ईरान-अमेरिका) का जिक्र किया, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
उन्होंने स्वीकार किया कि मार्च के बाद से वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है, लेकिन भारत की आर्थिक बुनियाद अन्य देशों की तुलना में काफी मजबूत है।
रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7 प्रतिशत और महंगाई दर का अनुमान 4.5 प्रतिशत रखा है। आरबीआई का मुख्य लक्ष्य मुद्रास्फीति को टिकाऊ आधार पर 4 प्रतिशत के स्तर तक लाना है, जिसके लिए बैंक पूरी तरह सतर्क है।
रेपो रेट में बदलाव न होने से आम आदमी को राहत मिली है क्योंकि अब होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।
हालांकि, जो लोग ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कर रहे थे, उन्हें अभी और इंतजार करना होगा क्योंकि बैंक ने दरों को घटाने के संकेत नहीं दिए हैं। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करने वाले निवेशकों के लिए भी ब्याज दरें मौजूदा स्तर पर ही बनी रहेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकट और महंगाई को देखते हुए आरबीआई का यह ‘रुको और देखो’ वाला दृष्टिकोण बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मददगार साबित होगा।
