पश्चिम एशिया युद्ध के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ी राहत, 16 हजार टन एलपीजी लेकर मंगलुरु बंदरगाह पहुंचा विशाल ‘अपोलो ओशन’ मालवाहक जहाज

पश्चिम एशिया युद्ध के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ी राहत, 16 हजार टन एलपीजी लेकर मंगलुरु बंदरगाह पहुंचा विशाल ‘अपोलो ओशन’ मालवाहक जहाज

मंगलुरु, 27 मार्च (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भीषण युद्ध और तनावपूर्ण वैश्विक हालातों के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक सुखद खबर सामने आई है।

कर्नाटक के न्यू मंगलुरु पोर्ट (NMP) पर कच्चे तेल और एलपीजी ले जाने वाले जहाजों का आवागमन बिना रुके जारी है। इसी कड़ी में, ‘अपोलो ओशन’ नामक एक विशाल एलपीजी कार्गो जहाज गुरुवार शाम करीब 4 बजे सुरक्षित रूप से मंगलुरु बंदरगाह पर लंगर डाल चुका है।

यह जहाज सबसे पहले गुजरात के बंदरगाह पर रुका था, जहाँ खेप का आधा हिस्सा उतारने के बाद शेष स्टॉक लेकर यह कर्नाटक पहुंचा है। इस सफल आवाजाही ने युद्ध के कारण आपूर्ति ठप होने की आशंकाओं पर फिलहाल विराम लगा दिया है।

पोर्ट अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘अपोलो ओशन’ जहाज में कुल 16,000 मीट्रिक टन एलपीजी लदी है, जिसे उतारने की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में शुरू कर दी गई है।

अनुमान है कि पूरी गैस को सुरक्षित रूप से डिपो तक पहुंचाने में लगभग दो दिन का समय लगेगा। बंदरगाह पर इस निरंतर सक्रियता से स्थानीय उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है।

राहत की बात यह भी है कि आने वाले कुछ दिनों में कच्चे तेल से लदे दो और बड़े जहाजों के मंगलुरु पहुंचने की पूरी संभावना है, जिससे देश के पास ईंधन का पर्याप्त बफर स्टॉक सुनिश्चित हो सकेगा।

वर्तमान में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Hormuz Strait) के समुद्री मार्ग पर संकट के बादल मँडरा दिए हैं। दुनिया के कुल कच्चे तेल और एलपीजी व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इसी संकरे मार्ग से होकर गुजरता है, जिस पर ईरान की भौगोलिक स्थिति सामरिक नियंत्रण रखती है।

युद्ध की स्थिति में इस मार्ग के बाधित होने का सीधा असर वैश्विक कीमतों पर पड़ता है। हालांकि, भारतीय बंदरगाहों पर जहाजों का समय पर पहुंचना यह दर्शाता है कि भारत सरकार और पेट्रोलियम कंपनियां वैकल्पिक सुरक्षा उपायों और कूटनीतिक रास्तों के माध्यम से आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने में सफल रही हैं।

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