नीतीश का दिल्ली प्रस्थान: बिहार की सत्ता में नए समीकरण की आहट, कौन होगा अगला मुख्यमंत्री?

नीतीश का दिल्ली प्रस्थान: बिहार की सत्ता में नए समीकरण की आहट, कौन होगा अगला मुख्यमंत्री?

पटना, 06 मार्च (वेब वार्ता)। बिहार की राजनीति में एक युग का अंत होता दिख रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।

इस चौंकाने वाले घटनाक्रम के बाद अब बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि क्या भाजपा मध्य प्रदेश और राजस्थान की तर्ज पर किसी नए चेहरे को कमान सौंपेगी या फिर जेडीयू के किसी वरिष्ठ नेता पर दांव लगाया जाएगा।

नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के फैसले को उनकी सक्रिय राजनीति से सम्मानजनक विदाई और केंद्र में नई भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है।

नीतीश कुमार के इस कदम पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ‘ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट’ (AIUDF) के नेता रफीकुल इस्लाम ने आरोप लगाया कि भाजपा ने जेडीयू के हाथ से बिहार छीन लिया है और अब राज्य में भाजपा का मुख्यमंत्री होना तय है।

वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने इसे बिहार की जनता के साथ धोखा बताया है। हालांकि, बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने बचाव करते हुए कहा कि यह मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत फैसला है और ‘विकसित बिहार’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अभिभावक के रूप में उनका मार्गदर्शन मिलता रहेगा।

नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में सत्ता का नया समीकरण कैसा होगा, इसे लेकर मंथन जारी है। चर्चा है कि यदि मुख्यमंत्री भाजपा से होता है, तो जेडीयू की ओर से कितने उपमुख्यमंत्री बनाए जाएंगे ताकि गठबंधन का संतुलन बना रहे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस बार बिहार में अपना पूर्ण वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश में है। आने वाले कुछ दिनों में राज्यपाल के पास नई सरकार के गठन का दावा पेश किया जा सकता है, जिससे यह साफ हो जाएगा कि पटना की सत्ता की चाबी अब किसके हाथों में होगी।