सूरत : सरथाना स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर में शिक्षापत्री द्वि शताब्दी महोत्सव की भव्य शुरुआत
शिक्षापत्री पोथी यात्रा, पूजा, यज्ञ एवं महिमागान के साथ गूंजा भक्तिभाव, बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल
मणिनगर श्री स्वामीनारायण गादी संस्थान द्वारा संचालित श्री स्वामीनारायण मंदिर, सरथाना (सूरत) में श्री स्वामीनारायण गादी के ज्ञानमहोदधि श्री जितेंद्रियप्रियदासजी स्वामीजी महाराज की प्रेरणा से ‘शिक्षापत्री द्वि शताब्दी महोत्सव’ की पहल के अंतर्गत शिक्षापत्री पोथी यात्रा, पूजा, महिमागान सहित विविध धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर शिक्षापत्री पोथी यात्रा अयोध्या चौक, सरथाना से प्रारंभ हुई। सुंदर रूप से सजी बैलगाड़ियों में घनश्यामजी महाराज, शिक्षापत्री के रचयिता सहजानंद स्वामी महाराज सहित अन्य मूर्तियों को विराजमान किया गया। बैलगाड़ियों में संतों की उपस्थिति रही। पारंपरिक परिधानों में सजे छोटे बच्चों एवं सिर पर शिक्षापत्री धारण किए महिलाओं ने यात्रा में भाग लेकर कार्यक्रम को भक्तिमय स्वरूप प्रदान किया। यात्रा के दौरान कीर्तन एवं भक्ति उत्सव का श्रद्धालुओं ने आनंद लिया।
पोथी यात्रा के मंदिर पहुंचने पर ग्रंथरत्न शिक्षापत्री की विधिवत पूजा एवं महिमा का गायन किया गया। मंत्रोच्चार के साथ विश्व शांति हेतु यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित भक्तों ने आहुति देकर पुण्य लाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर महंत संत शिरोमणि नित्यप्रकाशदासजी स्वामी, वडोदरा एवं सूरत के पूर्व महंत हरिकेशवदासजी स्वामी, संत शिरोमणि मुनीश्वरदासजी स्वामी, महंत सनातनीदासजी स्वामी, गुरुप्रियदासजी स्वामी सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे।
शिक्षापत्री की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए गुरुप्रियदासजी स्वामी ने कहा कि ‘शिक्षापत्री’ केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के लिए सद्गुण, अनुशासन और नैतिक मूल्यों पर आधारित आदर्श जीवन जीने का मार्गदर्शक है। संस्कृत में रचित 212 श्लोकों का यह ग्रंथ बीते दो सौ वर्षों से समाज सुधार और आध्यात्मिक उत्थान का आधार बना हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वामीनारायण भगवान द्वारा दिए गए आदेशों का संकलन शिक्षापत्री न केवल सत्संगियों, बल्कि पूरी मानवता के लिए कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।
कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. कोणार्क लारिंस ने शिक्षापत्री को मानव कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण सीढ़ी बताया था। शिक्षापत्री उत्सव का उद्देश्य भगवान की प्रसन्नता प्राप्त करना और समाज में सद्भाव, शांति एवं नैतिक मूल्यों का प्रसार करना है। भावना से किए गए कार्यों की सफलता का संदेश देते हुए कार्यक्रम का समापन हुआ।
