ट्रंप का सख्त फरमान; ग्रीन कार्ड का आवेदन कर रहे कपल की हो रही बारीकी से जांच
अब सिर्फ शादी करने से ग्रीन कार्ड नहीं मिल जाता
वॉशिंगटन, 03 जनवरी (वेब वार्ता)। अमेरिका में परमानेंट रेजीडेंसी यानी ग्रीन कार्ड को नागरिकता की दिशा में बड़ा कदम समझा जाता है। यह अप्रवासियों को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देता है। हालांकि, ग्रीन कार्ड होल्डर को अमेरिकी नागरिक के सभी अधिकार नहीं मिलते, लेकिन यह उन्हें कई जरूरी फायदे दिलाता है। इसकारण इस परमिट की भारी डिमांड रहती है। अभी तक ग्रीन कार्ड हासिल करने के लिए किसी अमेरिकी नागरिक से शादी करने को सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होने जा रहा है। इमिग्रेशन जानकारों का कहना है कि सिर्फ अमेरिकी नागरिक से शादी अब परमानेंट रेजिडेंसी की गारंटी नहीं बचा है।
अमेरिकी कानून के अनुसार, किसी अमेरिकी नागरिक के पति या पत्नी को निकट संबंधी माना जाता है। इससे वे अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) के जरिए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि योग्यता का मतलब मंजूरी नहीं है। एक रिपोर्ट में इमिग्रेशन वकील ब्रैड बर्नस्टीन के हवाले से कहा गया कि सिर्फ शादी करने से ग्रीन कार्ड नहीं मिल जाता।
बर्नस्टीन ने कहा कि अब शादी पर आधारिक ग्रीन कार्ड आवेदनों को बहुत ज्यादा बारीकी से जांचा जा रहा है। खासतौर पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान इसमें तेजी आई है। अधिकारी शादी की कानूनी स्थिति पर कम और इस बात पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं कि क्या यह असल में सच्ची शादी है। ट्रंप प्रशासन ने इमिग्रेशन को लेकर सख्त नीति अपना रखी है, जिसमें डायवर्सिटी वीजा लॉटरी को सस्पेंड करना भी शामिल है। इससे हर साल करीब 50000 आप्रवासियों को वीजा दिया जाता था।
बर्नस्टीन ने बताया कि शादी के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल करने के लिए अब साथ रहना एक निर्णायक फैक्टर बन गया है। उन्होंने कहा, सिर्फ रिलेशनशिप में होने से आपको ग्रीन कार्ड नहीं मिलता। साथ रहने से मिलता है। इसके साथ ही चेतावनी दी कि जो कपल शादी कर चुके हैं लेकिन अलग रहते हैं, उनके आवेदन खारिज होने का खतरा सबसे ज्यादा है।
बर्नस्टीन के अनुसार, अगर पति-पत्नी एक ही घर में नहीं रहते हैं, तब उनका ग्रीन कार्ड केस पहले ही खराब हो रहा है। उन्होंने कहा कि इमिग्रेशन अधिकारी अलग रहने के लिए काम, पढ़ाई, पैसे या सुविधा जैसी वजहों को नहीं सुनते हैं। अलग रहने वाले जोड़ों की ज्यादा जांच होती है। इसमें शादी में धोखाधड़ी की संभावना, मुश्किल इंटरव्यू और कई बार आवेदन को सीधे खारिज कर दिया जाता है।
