अनेकों बार दुष्कर्म की पीड़िता की मौत इच्छामृत्यु से नहीं भोजन त्यागने से हुई!


(PC : winnenofleren/Instagram)

नीदरलैंड (ईएमएस)। रेप या दुष्कर्म ऐसा अक्षम्य कृत्य है जिसकी शिकार लड़की जीवित लाश की भांति ही होती है, उसकी आत्मा तो मर ही जाती है। ऐसे में उसके इच्छामृत्यु को लेकर बहस के बीच नीदरलैंड के शहर आर्नहम में एक 17 साल की लड़की ने अपने घर पर भूख से दम तोड़ दिया। नोवा ने इच्छामृत्यु के लिये कानून इजाजत मांगी थी, लेकिन उसे उसकी मंजूरी नहीं मिली। उसके बाद उसने अपने घर में रहकर भोजन त्याग दिया और मौत को गले लगा लिया है। 17 साल की नोवा पोथोवन ने अपने घर पर अपनी आखिरी सांसें ली। नोवा पोथावन के साथ 11 और 14 साल की उम्र में कई बार दुष्कर्म हुआ, जिससे नोवा डिप्रेशन में चली गई थी।

नोवा पोथावन ने अपनी आत्मकथा ‘लिविंग ऑर लर्निंग’ में अपने जीवन के संघर्षों को जिक्र किया है। नोवा पोथोवन ने भोजन त्यागने को लेकर एक हफ्ते पहले ही इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने 10 दिनों के अंदर मौत की बात कही थी।

नोवा को यूथेनेसिया की इजाजत नहीं मिली थी

पहले ‌यह समाचार काफा वायरल हुए कि नोवा की मौत इच्छामृत्यु से हुई। लेकिन बाद में यह स्पष्ट हुआ कि अदालत ने उसे इसकी इजाजत नहीं दी थी।

 

नोवा को लेकर अफवाहों का दौर ऐसा चला कि उनके माता-पिता को बाकायदा सोशल मीडिया पर आकर अपना बयान देना पड़ा कि उनकी बेटी की मौत का लिहाज किया जाए।

 

यूथेनेसिया, इच्छा-मृत्यु या मर्सी किलिंग (दया मृत्यु) पर दुनियाभर में बहस जारी है। इस मुद्दे से क़ानूनी के अलावा मेडिकल और सामाजिक पहलू भी जुड़े हुए हैं। यह पेचीदा और संवेदनशील मुद्दा माना जाता है। दुनियाभर में इच्छा-मृत्यु की इजाज़त देने की मांग बढ़ी है। मेडिकल साइंस में इच्छा-मृत्यु यानी किसी की मदद से आत्महत्या और सहज मृत्यु या बिना कष्ट के मरने के व्यापक अर्थ हैं। क्लिनिकल दशाओं के मुताबिक़ इसे इच्छा-मृत्यु अर्थात यूथनेशिया मूलतः ग्रीक (यूनानी) शब्द है। जिसका अर्थ ईयु-अच्छी, थेनट्स-मृत्यु होता है। क्लिनिकल दशाओं के मुताबिक़ इसे स्वैच्छिक एक्टिव यूथेनेसिया के तौर पर भी परिभाषित किया जाता है। मरीज़ की मंज़ूरी के बाद जान-बूझकर ऐसी दवाइयां देना जिससे मरीज़ की मौत हो जाए, यह केवल नीदरलैंड और बेल्जियम में वैध है। मरीज़ मानसिक तौर पर अपनी मौत की मंज़ूरी देने में असमर्थ हो तब उसे मारने के लिए इरादतन दवाइयां देना यह भी पूरी दुनिया में ग़ैरक़ानूनी है। मरीज़ की मृत्यु के लिए इलाज बंद करना या जीवनरक्षक प्रणालियों को हटाना। इसे पूरी दुनिया में क़ानूनी माना जाता है। यह तरीक़ा कम विवादास्पद है।