ऐसा शहर जो संमुद्र के उपर तैरेगा, जानिये कैसे होगा मुमकिन


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जो कभी तकनीक, अरबपतियों तथा आर्किटेक्ट्स का एक सपना सा लगता था वो जल्द ही साकार हो कर विश्व की सबसे बड़ी चुनौतियों का ठोस समाधान का कार्य करेगा।

बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के राउंड टेबल कॉन्फ्रेन्स में बिल्डरों, इंजीनियरों और वास्तुकारों के एक समूह ने एक किफायती फ़्लोटिंग शहर के लिए एक कन्सैप्ट शुरु किया।

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पिछले दिनों के विपरीत, जब इन भविष्यवादी डिजाइनों पर संदेह किया जाता था, संयुक्त राष्ट्र Human Settlement Programme (UN-Habitat) के कार्यकारी निदेशक, Maimunah Mohd Sharif ने कहा कि UN इस परियोजना का समर्थन करेगा।

“टीम पर हर कोई वास्तव में इसे बनाना चाहता है,” मार्क कॉलिन्स, CEO ओशियनिक्स कंपनी जो कि फ्लोटिंग स्ट्रक्चर का निर्माण करता है, ने कहा। “हम सिर्फ किताबों में बाक नहीं कर रहे हैं।”

कंपनी का मानना है कि एक फ्लोटिंग सिटी प्रोजेक्ट समुद्र के बढ़ते स्तर से होने वाली गंभीर कमी और खतरों दोनों को संबोधित करेगा। संरचनाओं को सभी प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए डिज़ाइन किया जाएगा, जिनमें बाढ़, सुनामी और श्रेणी 5 तूफान भी शामिल होंगे।

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शहर के स्ट्रक्चर में कलैक्शन ऑफ षठभुज प्लैटफाॅर्म होंगे जिसमें हर प्लैटफॉर्म पर लगभग 300 रेसिडंस होंगे। षठभुज सबसे काबिल आर्किटेक्चरल आकार माना जाता है। हर प्लैटफॉर्म को षठभुज के आकार में बना कर बिल्डर भी मैडिरियल के इस्तेमाल को कम कर सकते हैं।

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शहर के डिज़ाइन में कुल 6 प्लैटफॉर्म्स होंगे जो कि गाँव कहे जाएंगे तथा 6 गांव मिल कर अक शहर बनाएंगे। इसके अलावा इस शहर में इंधन वाली गाड़ियां चलती नहीं नज़र आएंगी तथा यहां कचरे के ट्रक भी घूमते नहीं नजर आएंगे। कचरा एक ट्यूब के माध्यम से सॉर्टिंग के लिए जाएगा। पानी का सही उपयोग तथा ओशियन फार्मिंग यानी पानी के अंदर खेती करना, संमुद्र जीवों के वेस्ट से फर्टिलाइज़र तथा इसके अलावा और भी कई खास बाते हैं इस शहर की जो लोगों का ध्यान इसकी ओर आकर्षित करती है।

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इसके अलावा प्लैटफॉर्म्स को किसी कोस्टल शहर के नजदीक ही बनाया जाएगा ताकि आपदा के समय उसे शहर के पास ले जाया जा सके और लोग शहर में जा सकें।