सू की के करीबी बने म्यामांर के राष्ट्रपति


नेपीतौ । नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की के करीबी और लंबे समय से सहयोगी रहे हेतिन काव को म्यामांर की संसद ने करीब आधी सदी बाद देश का पहला असैनिक राष्ट्रपति चुन लिया है। सैन्य शासन के अधीन रहे देश के राजनीतिक इतिहास में यह एक नया मोड़ है। ६९ वर्षीय हेतिन काव को म्यामांर की संसद के दोनों विधायी सदनों में ६५२ में से ३६० मत मिले। इसके साथ ही संवैधानिक प्रावधानों के चलते राष्ट्रपति बनने से रोक दी गयीं की के लिए परदे के पीछे से इस पद की जिम्मेदारी संभालने का रास्ता साफ हो गया है। मतगणना की लंबी प्रक्रिया के बाद जब परिणाम की घोषणा की गयी तो राजधानी में खुशी की लहर दौड़ पडी। हतिन क्याव, सू की और उनके परिवार के विश्वसनीय मित्र हैं। वह खुद एक कवि हैं, और उनके पिता भी जाने-माने कवि और एनएलडी के समर्थक थे। क्याव ने भी उसी वक्त ऑक्सफोर्ड से डिग्री हासिल की है, जिस वक्त सू की का परिवार वहां था। जब सू की म्यांमार में नजरबंद थीं, तो उस दौरान जिन चंद लोगों को उनसे मिलने की इजाजत थी, उनमें से एक क्याव भी थे। जब सू की को कुछ दिनों के लिए आजाद किया जाता था, तो क्याव उनके निजी ड्राइवर की भूमिका में होते थे। सू की की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोव्रेâसी (एनएलडी) के पास दोनों सदनों में भारी बहुमत है, लेकिन अब भी म्यांमार में पूरा लोकतंत्र नहीं है। सेना ने लोकतंत्र पर अपनी पकड़ बनाए रखी है, जिसके सहारे संसद में एक चौथाई सांसद सेना द्वारा चुने जाते हैं। इसके बावजूद सू की अपने भारी बहुमत के बल पर राष्ट्रपति बन सकती थीं, पर सेना ने संविधान में एक ऐसा नियम डाल दिया है, जिससे वह इस पद के लिए अपात्र घोषित हो जाती हैं।
इस नियम के मुताबिक, जिस किसी के करीबी परिजनों में से एक भी विदेशी नागरिक हो, तो वह राष्ट्रपति नहीं बन सकता। सू की के पति भी विदेशी नागरिक थे और उनके बेटों ने ग्रेट ब्रिटेन की नागरिकता ले रखी है, इसलिए वह राष्ट्रपति बनने के लिए अपात्र हो जाती हैं। यह नियम सेना ने सू की को राष्ट्रपति बनने से रोकने के इरादे से ही बनाया था। सू की ने चुनावों के बाद संविधान से इस नियम को हटाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन अब लगता है कि उन्होंने भी हार मान ली है।