सगे-संबंधियों में शादी से जन्म ले रहे दुर्बल बच्चे


लंदन। कई मुस्लिम परिवारों में खून के रिश्ते में ही शादी करने का रिवाज चलता है। इस शादी को फस्र्ट कजन मैरिज भी कहा जाता है। इसको लेकर पाकिस्तान मूल की ब्रिटिश नागरिक और पहली ब्रिटिश एशियाई पीर बारोनेस फ्लादर का कहना है कि एक ही परिवार में शादी होने से शारीरिक रुप से दुर्बल बच्चे जन्म ले रहे हैं। इस समस्या को रोकने के लिए पहले डीएनए टेस्ट का सहारा लिया जाना चाहिए। उन्होंने सगे-संबंधी के साथ यौन सम्पर्वâ पर सवाल उठाते हुए इस तरह की शादियों से हानि पहुंचने की बात कही हैं। फ्लादर ने हाउस ऑफ लॉड्र्स में कहा, ‘दुनियाभर के कई समुदायों में फस्र्ट कजन मैरिज का रिवाज है। खासतौर पर उन पाकिस्तानियों में जो कश्मीर से हैं। आज हम डीएनए के बारे में इतना कुछ जानते हैं। इसके बावजूद ऐसा होना और अपंग बच्चे पैदा होना बहुत खौफनाक है। आप ऐसे किसी भी परिवार में चले जाएं, चार-पांच में से एक या दो बच्चे ऐसे होंगे, जिनमें अपंगता है। यह अस्वीकार्य है। यदि हम इस दिशा में कुछ नहीं कर पाए तो क्या यह उन बच्चों के साथ नाइंसाफी नहीं होगी? किसी सामाजिक प्रथा के लिए हम बच्चों को अपंगता के साथ पैदा नहीं कर सकते।’ बारोनेस फ्लादर का जन्म अखंड भारत के लाहौर में १३ फरवरी १९३४ को हुआ था। उनकी शिक्षा यूनिर्विसटी कॉलेज लंदन में हुई। उन्होंने लंबे समय तक लंदन में वकालत की। बाद में टोरी पार्टी से जुड़ी रहीं। पीर हाउस ऑफ लॉड्र्स का सदस्य होता है। अधिकांश सदस्य लाइफ पीर्स हैं यानी वे ताउम्र बने रहेंगे। ९२ सदस्य वंशानुक्रम के चलते यहां स्थान पाते हैं। प्रधानमंत्री की अनुशंसा पर ब्रिटेन की महारानी लाइफ पीर्स की नियुक्ति करती है। ब्रिटेन में फस्र्ट कजन मैरिज को कानूनी मान्यता हासिल है। हालांकि वहां रह रहे पाकिस्तानी इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा अरब और अप्रâीकी परिवारों में ऐसे रिश्ते मान्य हैं। ब्रिटेन में पैदा होने वाले तीन फीसदी बच्चे पाकिस्तानी परिवारों के होते हैं। वहीं ब्रिटेन में आनुवंशिक बीमारी के साथ पैदा होने वाले बच्चों में तीस फीसदी इन पाकिस्तानी परिवारों के होते हैं।