यूरोप में शौचालयों से फैली महामारी !


-रोमन साम्राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य के अनूठे उपाए बने अभिशाप
लंदन । एतिहासिक सत्य है कि जव भी किसी सभ्यता या सम्राज्य का विस्तार विश्व के अन्य महाद्वीपों में होता है तो यह अपने साथ कुछ बदलाव और अभिनव प्रयोग भी लेकर आते हैं। इसी तरह आज से लगभग दो हजार वर्ष पूर्व यूरोप में जब रोमन साम्राज्य का विस्तार हुआ तो वे अपने साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य कुछ अनूठे उपाए लाए। इनमें से एक था ‘शौचालय’। लेकिन इससे स्वास्थ्य में इतना सुधार नहीं हुआ, जितना कि सोचा गया था। यानि बीमारियों के पैâलने से रोकने में यह उपाए इतना कारगर सावित नहीं हुआ। वैâम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक शोधकर्ता पीयर्स मिशेल का कहना है कि रोमन साम्राज्य के प्रसार के पहले संपूर्ण यूरोप मे कहीं भी सीवरेज प्रणाली नहीं थी। रोमन लोगों ने समूचे योरोप में सार्वजनिक स्नानागार बनाए। सीवरेज और टायलेट सिस्टम का निर्माण कराया। लेकिन इनकी साफ-सफाई का बेहतर तरीके से ध्यान नहीं रखा जाता था। इन स्नानागारों में गर्म और आद्र्र वातावरण के कारण परजीवियों को पनपने का मौका मिला। कारण था मल के निष्पादन का कोई करगर तरीका नहीं था। क्योंकि मानव मल को खाद के रूप में इस्तेमाल करने से पहले महीनों तक कम्पोस्ट करना पड़ता है। रोमन लोगों को यह तरीका पता नहीं था। ऐसे में परोक्ष रूप से मानव मल पर पनपने वाले परजीवी लोगों की सेहत के लिए खतरा बन गए। मिशेल को अपने शोध में आशा थी कि पुरात्तविक खोज के दौरान उन्हे कुछ परजीवियों जैसे रिंग वर्म (गोल कुमि) पर अंकुश के लक्षण मिलेंगे। लेकिन चौकाने वाले तथ्य उजागर हुए। सीवरेज और टायलेट सिस्टम के बावजूद रिंग वर्म की संख्या में कोई कमी दर्ज नहीं हुई। रोमन साम्राज्य के हिस्सोंंं में मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुॅचाने वाले परजीवी काफी संख्या में विद्यमान थे। मिशेल का मानना है कि इससे यूरोप के कुछ हिस्सों में आंशिक रूप से महामारी पैâली। यूरोप को काफी समय तक पेचिश ने परेशान किया। वहीं शोध में पाया कि रोमन फिश सॉस ‘गैरम’ भी यूरोप में टैप वर्म के पैâलाव का कारण बना।