यमन हवाई हमले में 25 की मौत, मध्य-पूर्व में बढ़ा तनाव


सना। यमन पर सऊदी अरब की तरफ से किए गए हवाई हमले में राजधानी सना में २५ लोगों की मौत हो गई और ४० लोग घायल हुए हैं। सऊदी अरब की अगुआई में दस देशों ने २३५ जेट फाइटरों की मदद से सदा, सना और लाज जैसे शहरों के ऊपर बमबारी की। साथ ही इस हमले में राष्ट्रपति के आवास को भी निशाना बनाया गया। इस बीच, हवाई हमलों की वजह से यमन में करीब चार हजार भारतीय पंâसे हुए हैं।
सउदी अरब के सूत्रों के मुताबिक हवाई हमले में सउदी अरब के १०० जेट फाइटर विमान, संयुक्त अरब अमीरात के ३० फाइटर विमान और कुवैत तथा बहरीन के १५-१५ फाइटर विमान शामिल थे। साथ ही १० विमान कतर के तथा २-४ विमान जार्डन, मोरक्को, सूडान के भी थे। इसके अलावा इस हमले में पाकिस्तान और मिस्त्र की नौसेना ने भी अहम भूमिका निभाई। शुक्रवार को सउदी अरब ने यमन में डेढ लाख सैनिकों की फौज से हमला करने की तैयारी की है। यमन के खिलाफ हमले में शामिल सभी देश सुन्नी मुाqस्लम बहुल देश हैं जबकि यमन में शिया मुाqस्लमों की संख्या ज्यादा है।
यमन के खिलाफ जारी हमले से समूचे मध्य पूर्व में शिया-सुन्नी के बीच तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। खासतौर से शिया बहुल मुाqस्लम देश ईरान जहां ८० प्रतिशत आबादी शिया मुाqस्लमों की है, ने इस हमले पर बेहद संभलकर प्रतिक्रिया दी है। लेकिन आग ज्यादा भड़कती देख ईरान के इस युद्ध में वूâदने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ईरानी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि इस मसले का राजनीतिक समाधान निकाला जाना चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक, गुरूवार के हवाई हमले में यमन के कई अहम सैन्य ठिकाने बर्बाद हो गए हैं। इनमें हाउती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले लड़ावूâ विमान, एयर फोर्स ज्वाइंट ऑपरेशन कमांड, फस्र्ट आर्मर्ड डिविजन्स हेडक्वॉर्टर्स, सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट समेत कई हेडक्वॉर्टर और वैंâप शामिल हैं। शिया हाउती विद्रोहियों की मदद ईरान कर रहा है।
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय की ओर से मीडिया को दी गई जानकारी के मुताबिक, यमन पर हवाई हमले में सऊदी अरब के १५० विमान, अमीरात के ३०, कुवैत और बहरीन से १५-१५, कतर से १०, जॉर्डन और मोरक्को से ६-६ और सूडान से ३ विमान शामिल हुए। रक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी भी दी कि मिस्र, पाकिस्तान और जॉर्डन यमन में जमीनी लड़ाई के लिए अपने सैनिक भी भेजने को तैयार हैं। मंत्रालय ने यह दावा भी किया कि अमेरिका की तरफ से भी उन्हें इंटेलिजेंस और लॉजिाqस्टकल मदद मुहैया कराई जा रही है।