मोदी शासनकाल में सांप्रदायिक िंहसा में वृद्धि : रिपोर्ट


लंदन। इंटरनैशनल ह्यूमन राइट्स ग्रुप ऐमनस्टी ने नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भारत में मोदी सरकार के शासन दौरान सांप्रदायिक िंहसा बढ़ी है । संगठन ने यह भी कहा है कि भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की वजह से हजारों भारतीयों के मन में जबरन बेदखली का खतरा पैदा हो गया है। ऐमनस्टी इंटरनैशनल ने बुधवार को अपनी ऐनुअल रिपोर्ट २०१५ में पिछले साल मई के आम चुनावों को लेकर चुनाव संबंधी िंहसा, सांप्रदायिक झड़पों और कॉर्पोरेट परियोजनाओं पर सलाह-मशवरे में नाकामी को मुख्य िंचताओं के तौर पर जाहिर किया है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘मई में आम चुनाव के बाद भाजपा की अगुआई वाली सरकार सत्ता में आई। सुशासन और विकास का दावा करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबी में जी रहे लोगों के लिए वित्तीय सेवा की पहुंच और स्वच्छता बढ़ाने को लेकर प्रतिबद्धता दिखाई।’ रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कॉर्पोरेट से जुड़ी परियोजनाओं से प्रभावित समुदायों के साथ विचार-विमर्श की जरूरतों को कम करने की दिशा में कदम उठाए। यह भी जिक्र किया गया है कि अधिकारी लगातार लोगों की निजता और अभिव्यक्ति के अधिकार का उल्लंघन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में सांप्रदायिक िंहसा में बढ़ोतरी हुई और भ्रष्टाचार, जाति आधारित भेदभाव के अलावा जातिगत िंहसा पैâली है।
सांप्रदायिक िंहसा का जिक्र करते हुए कहा गया है, ‘इलेक्शन से पहले उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक घटनाएं हुर्इं, जिससे िंहदू और मुाqस्लम समुदाय के बीच तनाव पैदा हो गया। कुछ नेताओं पर भी भड़काऊ भाषण देकर िंहसा भड़काने की कोशिश के आरोप लगे।’ रिपोर्ट में कहा गया है, ‘दिसंबर में कई मुाqस्लम और ईसाइयों को िंहदू संगठनों पर जबरन िंहदू धर्म में शामिल करने का भी आरोप लगा था।’