भारत और नेपाल विवाद में नहीं पड़ना चाहता चीन


बीिंजग । भारत और नेपाल के बीच छिड़े मौजूदा विवाद में चीन नेपाल की मधेशी आबादी के आंदोलन से पैदा हुई ाqस्थति में नहीं पड़ना चाहता। सूत्रों के अनुसार जरूरत पड़ने पर चीन नेपाल को मदद मुहैया कराएगा लेकिन इसके लिए बीिंजग के हितों का भी ध्यान रखा जाएगा। चीन सिर्पâ तात्कालिक व्यवस्था के तहत नेपाल को पेट्रोल, डीजल जैसे उत्पाद मुहैया करा सकता है। नेपाल में पैदा अशांति से बिगड़े भारत-नेपाल संबंधों के बारे में चीन जानता है कि ये जल्द ठीक होने वाले नहीं हैं। नेपाल में लागू हुए नए संवैधानिक प्रावधानों के चलते वहां के हालात बिगड़े हैं। चीन चाहता है कि नेपाल अपनी क्षमता से अपना अंदरूनी मामला निपटाए। लेख में लिपू-लेख दर्रे का भी जिक्र किया गया है, जो नई दिल्ली व काठमांडू के बीच विवाद की एक वजह रहा है। भारत और चीन के संयुक्त बयान में इस दर्रे का जिक्र होने पर नेपाल ने उस पर विरोध जताया था। नेपाल के इस रुख ने चीन को सतर्वâ कर दिया है कि वह ताजा विवाद से दूर रहे। उल्लेखनीय है कि भारत और चीन व्यापार को बढ़ावा देने के लिए लिपू-लेख दर्रे का इस्तेमाल करना चाह रहे हैं। इस दर्रे के नजदीक ही नेपाल की सीमा भी है जिसके चलते उसे इस व्यापार मार्ग को लेकर आपत्ति है। इस आपत्ति की गूंज नेपाल की संसद में भी हो चुकी है।