‘प्रोस्टेट कैंसर’ की दवा के पेटेंट को लेकर केन्द्र को नोटिस


कैलिफोर्निया । दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र से साफ कहा है कि भारतीय पेटेंट कार्यालय ने किस आधार पर प्रोस्टेट कैंसर की अपनी दवा का पेटेंट मांगने के रीजेंट्स ऑफ यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के आवेदन को खारिज किया है। जस्टिस संजीव सचदेव ने पूछा, पेटेंट कार्यालय के अधिकारी ने किस तरह अपने आदेश की पुष्टि की? उन्होंने किन एविडेंस के आधार पर आदेश जारी किया?” कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी कर दो मई तक जवाब मांगा है। प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली ‘एक्सटेंडी’ नाम की दवा की खोज करने वाले यूनीवर्सिटी ने दावा किया कि उसे 2007 के बाद से दुनिया भर में 50 से अधिक न्यायालयों में उसके इनोवेशन के लिए पेटेंट दिया गया। यूनिवर्सिटी ने कहा कि हालांकि दवा को भारत में बेचने के लिए मंजूरी दी गई, पेटेंट के लिए उसका ऐपलिकेशन इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि इसमें कोई इनोवेशन नहीं है जबकि इसके लिए उस सबूत का उल्लेख नहीं किया गया जिसके आधार पर यह खोज पेटेंट कार्यालय पहुंची थी।
जापान की एस्टेलास फार्मा कंपनी को अमेरिका के बाहर यह दवा बेचने का अधिकार मिला हुआ है। वह भारत में एक महीने की खुराक के लिए 112 कैप्सूल 3.35 लाख रपये की कीमत पर बेचती है। इसकी पैरवी अदालत में वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी ने दावा किया कि 2007 में पेटेंट के लिए दिया गया उसका आवेदन पिछले साल नवंबर में दूसरी कंपनियों के विरोध के आधार पर खारिज कर दिया गया। यूनिवर्सिटी के अनुसार, उसने अपने दावे के सपोर्ट में जो ऐपलिकेशन सौंपे थे, उस पर आवेदन खारिज करने के आदेश में ध्यान नहीं दिया गया, ना ही उसे आगे किसी के पास भेजा गया। यूनिवर्सिटी ने मांग की है कि उसके पेटेंट के आवेदन को उन प्रमाणों पर ध्यान देने के लिए अथॉरिटी के पास वापस भेजा जाए जो उसने अपने दावे के सपोर्ट में सौंपे हैं।