पत्रकार को आतंकियों के मनोविज्ञान पर बनाई फिल्म ने दिलाई शोहरत


पेरिस। प्रâांस के पत्रकार को उसके साहस ने विश्व में शोहरत दिला दी है। वह आतंकवादियों के चरित्र और मनोविज्ञान को समझने के लिए उनके बीच रहा। हालांकि इसके लिए उसने अपना झूठा नाम रखा था।
जानकारी के अनुसार उसकी फिल्म सार्वजनिक होने के बाद उसकी भी मुश्किले बढ़ गई है। देश की खुफिया एजेंसी उसके संपर्वâ में हैं। वह आतंकवादियों से जुड़ी जानकारी उससे जानना चाहती हैं। पत्रकार ने खूफिया वैâमरे के जरिए आतंकवादियों की हरकतों को शूट भी किया है। अल्लाह सोल्जर्स नाम की यह डॉक्यूमेंट्री प्रâांस में दिखाई गई। पत्रकार ने अपना नाम बदलकर रमजी रख लिया। इसके बाद वह पेâसबुक पर उन लोगों के साथ जुड़ने लगा, जो कि आतंक का समर्थन करते थे। इसके बाद उसके संपर्वâ में एक व्यक्ति आया, जो कि खुद को एक गुट का कमांडर बताता था। वह व्यक्ति रमजी से प्रâांस में ही मिला। उसने कहा कि अगर वह आत्मघाती हमलावर बनता है तो जन्नत उसका इंतजार कर रहा है। वहां परियां खातिरदारी के लिए खड़ी हैं। वहां महल, सोने के घोड़े और हीर जवाहरात उसे मिलेंगे। रमजी ने बताया कि एक बार उसे एक महिला मिली, उसने एक लैटर दिया। लैटर में लिखा था कि मरने तक नाइट क्लब में गोरीबारी करो और सिक्योरिटी पहुंचे तो खुद को उड़ा लो। रमजी ने बताया कि तब तक कई आतंकी गिरफ्तार हो चुके थे। एक आतंकी जो गिरफ्तार नहीं हुआ था उसने रमजी को पहचान लिया और उसका राज खत्म हो गया। रमजी ने बताया कि आतंकी वैंâप में इस्लाम के लिए कोई जगह नहीं है। वहां सिर्पâ भटके हुए, हताश और आत्महत्या के लिए प्रेरित और आसानी से भ्रमित किए गए युवा हैं। ये वो युवा हैं जो ढ़ूंढ तो कुछ और रहे थे, लेकिन उन्हें मिला कुछ और। उन्होंने कहा कि ये मेरा दुर्भाग्य है कि मैं इस समय में पैदा हुआ जब आईएसआईएस है।