नेपाल में मधेशियों व पुलिसकर्मियों के बीच संघर्ष


काठमांडू। नेपाल सरकार के लिए फिर से मुसीबत खड़ी हो गई है। सात मधेशी दलों और करीब दो दर्जन जातीय संगठनों के गठबंधन ने अधिक अधिकारों, पर्याप्त प्रतिनिधित्व और प्रांतीय सीमा के पुनर्सीमांकन से जुड़ी मांगों पर दबाव डालने के लिए रविवार को काठमांडू में विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान मधेशी आंदोलनकारियों और नेपाली पुलिस के जवानों के बीच तगड़ा संघर्ष हुआ।

कुछ घंटों तक चले विरोध प्रदर्शन से ही रविवार को सिंहदरबार (देश का मुख्य प्रशासनिक परिसर) के आसपास के इलाके में यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो गई। सरकारी कार्यालय खुलने के करीब एक घंटे पहले ही दो हजार से अधिक प्रदर्शनकारी सिंहदरबार और नयाबाणेश्वर इलाकों में एकत्र हो गए थे। वे जबरदस्ती इन प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने की कोशिश कर रहे थे। यही कारण रहा कि मुख्य सरकारी कार्यालयों पर तैनात की गई पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हाथापाई हुई।

प्रदर्शनकारी अपने हाथों में सरकार विरोधी नारों वाली तख्तियां लिए हुए थे। प्रदर्शनकारियों में सात मधेशी राजनीतिक दलों तथा 22 जातीय संगठनों के गठबंधन के कार्यकर्ता और नेता शामिल थे। किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को भी तैनात किया गया था।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में संघीय ढांचे के सात प्रांतीय मॉडल के पुनर्सीमांकन, मधेशियों समेत हाशिये पर पड़े समूहों, जातीय अल्पसंख्यकों, देसी समूहों तथा दलितों को राजकीय निकायों में समावेशन व आनुपातिक प्रतिनिधित्व शामिल है।

गठबंधन के एक दल नेपाल सद्भावना पार्टी के उपाध्यक्ष लक्ष्मण लाल कर्ण ने बताया, “मधेशियों के लिए प्रतिनिधित्व, विभिन्न प्रशासनिक तंत्र में पिछड़े समूहों और भाषा तथा नागरिकता प्रमाण पत्र संबंधी अधिकारों सहित आनुपातिक प्रतिनिधित्व हमारी अन्य मांगें हैं।” गठबंधन ने काठमांडू केंद्रित विरोध-प्रदर्शन शनिवार से ही शुरू कर दिया है। गत शुक्रवार को मधेशी दलों ने सरकार के वार्ता के आग्रह को ठुकरा दिया था। गठबंधन की मांग है कि सरकार देश में चल रहे राजनीतिक संकट को समाप्त करने के लिए होने वाली बातचीत के वास्ते “अनुकूल वातावरण” तैयार करे।

पिछले साल (सितंबर 2015 से फरवरी 2016 तक) देश की दक्षिणी सीमा पर छह महीने के संविधान विरोध कार्यक्रम के बाद गठबंधन ने अब अपनी रणनीति बदल ली है। सरकार और अन्य पक्षों का अपनी मांगों के प्रति ध्यान खींचने की कोशिश के तहत गठबंधन ने राजधानी काठमांडू पर ध्यान केंद्रित किया है। पिछले आंदोलन के दौरान 50 से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।