तालिबान की हमले की बजाय अपहरण की रणनीति


काबुल। तालिबान और अफगानिस्तान के बीच जारी शीत युद्ध में तालिबान ने अपनी रणनीति बदल दी है। पहले वह सीधे हमले किया करता था। अब वह हमले की बजाय अफगानी नागरिकों को घात लगाकर अगवा कर रहा है। ऐसी कई घटनाएं पिछले दिनों सामने भी आ चुकी है। इस कारण अब इससे निपटने के लिए अपनी रणनीति बनाने में जुट गया है।
जानकारी के अनुसार अफगानिस्तान में पिछले एक साल में अफगानी यात्रियों को हथियारबंद आतंकवादियों द्वारा अगवा करने मामले सामने आ रहे हैं। इसे राजनीतिक विश्लेषक अफगानियों को कुचलने नई रणनीति के रूप में देख रहे हैं। सशस्त्र आतंकवादियों ने ३१ मई को उत्तरी वुंâदुज शहर के बाहर काबुल-वुंâदुज राजमार्ग पर तीन बसों को हथियारों के बल पर रुकवाया और करीब २०० यात्रियों को अपने साथ ले गए। इस अपहरण की जिम्मेदारी तालिबान आतंकवादियों ने ली। उन्होंने १० मुसाफिरों को वहीं के वहीं मौत के घाट उतार दिया था और बाकी यात्रियों को छोड़ दिया, जबकि आठ यात्रियों को अज्ञात जगहों पर ले गए। कुछ दिन बाद हथियारबंद आतंकवादियों ने वुंâदुज में ही एक यात्री बस को रुकवाया और ४७ मुसाफिरों को जबरन बस से उतार उन्हें वुंâदुज प्रांत की राजधानी वुंâदुज शहर को पड़ोस के तखर प्रांत से जोड़ने वाली एक प्रमुख सड़क पर ले गए और उसके बाद उनमें से १० को अज्ञात जगह ले गए। पूर्वी गजनी प्रांत के प्रवक्ता जावेद सालांगी के अनुसार, इसके अलावा कुछ दिन पहले सर-ए-पोल प्रांत में दर्जनभर यात्रियों का अपहरण किया गया और पिछले मंगलवार को तालिबान आतंकवादियों ने बंधकों में से १२ को एंदर जिले में मौत के घाट उतार दिया। अफगानिस्तान के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सशस्त्र आतंकवादियों का बार-बार यात्रियों को अगुवा करना लोगों को आतंकित करने व सरकार को बदनाम करने की तालिबान समूह की नई रणनीति है। वुंâदुज प्रांतीय परिषद के सदस्य अमरुद्दीन वली ने हाल में समाचार एजेंसी को बताया, “यात्रियों का अपहरण राजमार्गों पर तालिबान के पूरी तरह नियंत्रण को दर्शाता है और साथ ही यह संदेश देता है कि सरकार राजमार्गों की हिफाजत सुनिाqश्चत करने में असमर्थ है।”