जॉर्डन में मिली चीन जैसी दीवार


दमिश्क। चीन की दीवार दुनिया की बात तो सभी जानते हैं पर अब पुरातत्वविदों को मध्य पूर्व एशिया के देश जॉर्डन में भी डेढ़ सौ किलोमीटर लंबी दीवार के अवशेष मिले हैं। कुछ जगहों पर समानांतर दीवार भी बनाई गई थी। एरियल सर्वे में कुछ स्थानों पर दीवार के बीच बने टॉवरों का भी पता लगा, वहीं चीन की दीवार में भी नियमित अंतराल पर टॉवर हैं। शोधकर्ता अभी बताने में सक्षम नहीं हो पा रहे कि जॉर्डन की दीवार किसने बनवाई और वास्तविक उद्देश्य क्या था। शोधकर्ताओं का मानना है कि दीवार, टॉवरों को शिकार व कई उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जाता होगा, व्यापार की सुगमता भी एक पहलू हो सकता है लेकिन रक्षा उद्देश्य के साथ इसका सीधा संबंध वे नहीं जोड़ पा रहे।
अनुमान है कि २३०० सौ साल पहले बनी २१ हजार किलोमीटर लंबी दीवार पर्वतीय क्षेत्र में है। उसे यूरेशियाई घुसपैठियों व हमलावरों से बचाने तथा व्यापार की सुगमता के लिए बनाया गया था। ६५ लाख की आबादी वाला जॉर्डन रेगिस्तानी है, वहां दीवार किससे रक्षा के लिए बनी, यह गहन शोध का विषय है। दीवार का नाम खत शबीब बताया गया। तथ्यों पर गहन शोध किया जा रहा है कि पत्थर से बनी दीवार को किसने और कब बनवाया। विशेषज्ञों की एक राय यह भी है कि सौ मील से लंबी दीवार पुराने किसानों और घुमंतू चरवाहों के बीच सीमा रेखा तय करने के लिए बनाई गई होगी। इसकी ऊंचाई साढ़े तीन फीट तथा चौड़ाई डेढ़ फीट की थी। इसके बीच में निगरानी के लिए बने टॉवरों की लंबाई १३ फीट और चौड़ाई साढ़े छह फीट थी। यह अनुमान भी लगाया गया कि कुछ टॉवर दीवार बनने के बाद बनाए गए होंगे।