गूगल और फेसबुक-व्हाटसएप को मिला तगड़ा झटका


बिना इजाजत जानकारियों नहीं खंगाल सकती
ब्रुसेल्स।कई बार इस तरह की मांग उठती रही हैं कि सोशल मीडिया में सामान्य नागरिक की जरुरी जानकारियां लीक हो जाती है।लेकिन सोशल मीडिया इस बारे में कोई जिम्मेदारी नहीं लेती थी जिसके कारण आम उपभोक्ता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब गूगल, पेâसबुक-व्हाट्सएप जैसी वंâपनियों को यूरोपीय संघ (ईयू) ने तगड़ा झटका दिया है। ईयू के मंगलवार को पेश नए विधेयक के मुताबिक, इंटरनेट वंâपनियां उपभोक्ताओं की स्पष्ट इजाजत के बिना उनकी जानकारियां खंगाल नहीं पाएंगी। अभी तक ये नियम दूरसंचार वंâपनियों पर ही लागू थे, जो कॉल और एसएमएस को पढ़कर या लोकेशन जानकर ग्राहकों को लुभावनी पेशकश करती थीं। ऑनलाइन विज्ञापनदाताओं का कहना है कि कड़े नियमों से वेबसाइटों की कमर टूट जाएगी और उनके लिए मुफ्त सेवाएं दे पाना मुाqश्कल हो जाएगा।
माइक्रोसॉफ्ट, पेâसबुक, व्हाट्सएप, ाqट्वटर के साथ जीमेल, याहूमेल, या हॉटमेल जैसी ईमेल सेवाएं ग्राहकों के ईमेल को पढ़ती हैं और उनकी पसंद-नापसंद के आधार पर उनके मेल या पसंदीदा वेबसाइटों पर विज्ञापन देती हैं। इसके लिए वे उपभोक्ताओं की इजाजत नहीं लेतीं। या फिर सेवा-शर्तों के लंबे चौड़े दस्तावेज में इसका मामूली जिक्र कर देती हैं और लॉगइन के साथ ही यूजर्स की स्वत: सहमति मान ली जाती है। इसी कमाई के बलबूते गूगल, पेâसबुक जैसी दिग्गज इंटरनेट वंâपनियां मुफ्त सेवाएं देती हैं। लेकिन ईयू के नए प्रस्ताव से उनकी कमाई गिरेगी। गूगल, याहू, िंबग जैसे सर्च इंजनों को इंस्टालेशन से पहले यूजर्स से पूछना होगा कि वेबसाइट पर कुकीज को इजाजत देंगे या नहीं। ब्राउजर के पहले के संस्करणों में डिफॉल्ट सेिंटग के साथ यूजर्स की इजाजत मान ली जाती थी। कुकीज ब्राउजरों के जरिये यूजर्स की जानकारी और उनकी पसंदीदा वेबसाइटों का पता लगाकर विज्ञापन वंâपनियों तक डाटा पहुंचाते हैं और ये वंâपनियां उस डाटा के आधार पर विज्ञापन देती हैं। कानून बनने के पहले यूरोपीय संसद से ये नियम पारित कराने होंगे।