किसी ने मोटा कहा तो खैर नहीं , ठोक सवेंâगे मुकदमा


लन्दन । ओवरवेट वर्वâर्स के पास जल्द ही पॉवर होगा कि वे उनके वजन को लेकर व्रूâर टिप्पणी करने वाले सहयोगियों के खिलाफ मुकदमा दायर कर सकते हैं। एम्प्लॉयमेंट लॉ में विशेषज्ञता वाले न्यायाधीश फिलिप रोस्टेंट ने यह दावा किया है। उन्होंने कहा कि वर्वâप्लेस में मोटापे को लेकर भेदभाव से निपटने के लिए कानून ही एकमात्र रास्ता है। वे कहते हैं कि ऐसे कानून ‘नॉन-आइडियल वेट’वाले लोगों के प्रति पूर्वाग्रह को रोकने में सक्षम होंगे जिन्हें नौकरी पाने में परेशानी होती है और बर्खास्त करने का अधिक जोखिम रहता है। एम्प्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल्स ऑफ इंग्लैंड एंड वेल्स के ट्रेिंनग डायरेक्टर जज फिलिप ने यह भी बताया है कि पतले सहयोगियों की तुलना में मोटे लोगों को औसतन कम भुगतान किया जाता है। शेफील्ड यूनिर्विसटी में लॉ प्रोपेâसर तमारा हार्वे के साथ लिख एकेडमिक पेपर में उन्होंने चेतावनी दी कि मोटे कर्मचारियों के लिए वर्वâप्लेस एक मुाqश्कल जगह हो सकती है। उन्होंने लिखा ‘व्यवहार धारणा और नकारात्मक अनुमान के आधार पर वर्वâप्लेस पर नॉन-आइडियल वेट (ओवर वेट या अंडर वेट) भेदभाव के अधीन है।’ पेपर में बताया गया है कि उम्र, जाति, िंलग, धर्म, यौन अभिविन्यास और विकलांगता के कारण लोगों से भेदभाव समानता अधिनियम २०१० के तहत गैरकानूनी है। हालांकि मोटे लोग तब ही प्रोटेक्टेड होते हैं अगर वे साबित कर दें कि वे अक्षम भी है। १९९३ में लगभग १४ प्रतिशत वयस्क मोटापे से ग्रस्त थे, ३० से अधिक का बॉडी मास इंडेक्स में यह पता चला था। यह आंकड़ा अब २५ प्रतिशत तब बढ़ गया है। इस महीने से पहले, शेफील्ड हलम यूनिर्विसटी के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि १८१ रिव्रूâटर्स को एक जैसे सीवी अलग-अलग फोटोग्राफ के साथ दिए गए जिसमें मोटे और दुबले लोग थे। लेकिन पाया गया कि मोटे लोगों वाले लगभग सभी उम्मीदवारों को रिजेक्ट कर दिया गया।